Thursday, 29 October 2015

" दलितों की दलील " :सवर्ण लड़कियों के विवाह किए जाएँ दलितों के साथ तब तो समाप्त हो सकता है आरक्षण !अन्यथा नहीं !!

      बंधुओ !कोई लड़की जिसे अपना नौकर भी बनाकर न रखना चाहे उसे पति बनाकर रखने के लिए उसे कैसे मजबूर किया जा सकता है !वो किसी भी जाति की क्यों न हो !
   ' लड़कियाँ लड़कियाँ होती हैं भेड़ बकड़ियाँ नहीं जो जिसके गले चाहो उसके गले बाँध दो !'
     "सवर्ण लोग अपनी लड़िकयों की शादी दलितों से करने लगें तो समाप्त हो सकता है जातिवाद !उसके बाद बंद हो सकता है आरक्षण !"-एक खबर 
    कितने गंदे लोग होते  हैं वे जो ऐसी दलीलें दे रहे हैं आखिर ऐसे लोग लड़कियों को समझते क्या हैं ?लड़कियाँ कोई चीज सामान हैं क्या जो किसी के गले में  लटका दी जाएँगी  !या फिर लड़कियाँ कोई जानवर हैं क्या जो उनके गले में रस्सी बाँधकर कर किसी के पीछे हाँक दी जाएँगी !
    सवर्णों की वे लड़कियाँ जिन्होंने कठोर परिश्रम पूर्वक शिक्षा ली हो संघर्ष एवं स्वाभिमान पूर्वक उन्नति करने के सपने बुने हों अपनी योग्यता के द्वारा राष्ट्रीय ज्ञान विज्ञान राजनीति चिकित्सा एवं प्राशासनिक आदि सेवा में कोई महत्वपूर्ण लक्ष्य हासिल करना चाहती हों जिसके लिए उन्होंने सारे जीवन शैक्षणिक तपस्या की हो अब जब उन्हें उनका लक्ष्य दिखने लगे तब उन्हें किसी ऐसे परिवार की बहू जबर्दश्ती क्यों बनाया जाना चाहिए जिस घर के लोग पढ़ना न चाहते हों, जिस घर के लोगों में स्वाभिमान भी न हो, जो लोग बिना आरक्षण के अपनी घर गृहस्थी चलाने का साहस ही न रखते हों, आरक्षण जैसी भिक्षा के भरोसे आत्म सम्मान विहीन जीवन जीने के लिए जो लोग आदी हो चुके हों !जो भी नेता या राजनैतिक दल कुछ देने की बात कर भर दे कि उसी के पीछे चल पड़ते हों, ऐसे पिठलग्गुओं के साथ कोई सुयोग्य स्वाभिमानी लड़की अपना विवाह क्यों करना चाहेगी और यदि कर भी ले तो निभेगी कितने दिन !
    जो वर्ग किसी भी प्रकार की प्रतिस्पर्धा से डरता हो ऐसे डरपोक लोगों के साथ जुड़कर कोई सुयोग्य लड़की अपनी जिंदगी क्यों बर्बाद करना चाहेगी !
     जिसके  माता पिता आरक्षण जैसी भीख से घृणा करते रहे हों और उन्होंने अपने बच्चों को ऐसे संस्कार दिए हों कि बेटा परिश्रम पूर्वक पढ़ाई करके स्वाभिमान पूर्वक ईमानदारी की कमाई से अपना जीवन यापन करना !नमक रोटी खा लेना किंतु किसी भी प्रकार की आरक्षण जैसी भीख के भरोसे मत जीना !कोई नेता कोई राजनैतिक दल तुम्हें कुछ देने का लोभ देकर तुम्हारा वोट लेने की बात करे तो ऐसे लोकतंत्र विरोधी लोगों को  धक्का देकर दरवाजे से भगा देना !नेता काम करने के लिए होते हैं वो सेठ साहूकारों की तरह कुछ देने की बातें क्यों करते हैं इसलिए ऐसी आत्म सम्मान को चोट पहुँचाने वाली बातें सहना भी मत !
   ऐसे स्वाभिमानी सुसंस्कारों में पली बढ़ी कोई सुयोग्य स्वाभिमानी कन्या किसी ऐसे व्यक्ति का वरण क्यों करना चाहेगी जिसमें कोई गुण ही न हों !ऐसी परिस्थिति में केवल बोझ समझकर उसे सारे जीवन ढोती हुई घुट घुट कर क्यों जीती रहे, ऐसा अन्याय क्यों किया जाए किसी ऐसी लड़की के साथ !आखिर उसका अपना जीवन है उसे उसके अनुशार क्यों न जीने दिया जाए !
   इसके विरुद्ध जो मूर्ख लोग आरक्षण समाप्त करने के लिए सवर्ण लड़कियों से जबरन शादी करने जैसी शर्तें करते हैं ऐसे मक्कारों को क्यों न दिया जाए मुख तोड़ जवाब !
    सवर्ण कन्याओं के साथ विवाह करने की लालषा रखने वाले नौजवानों को आरक्षण जैसी भीख का बहिष्कार करना पड़ेगा ,परिश्रम पूर्वक पढ़ना लिखना पड़ेगा, ईमानदारी पूर्वक आरक्षण मुक्त भावना से कमाने खाने की आदत डालनी पड़ेगी और आत्म सम्मान पूर्वक जीवन जीने का अभ्यास करना पड़ेगा भविष्य में बहुत ऊँचे उठने का संकल्प स्वयं बुनना होगा उसी के अनुशार अपना जीवन ढालना होगा !तब कहीं ऐसी बातें न्याय संगत मानी जा सकती हैं तब भी शादी किसी पर जबर्दश्ती थोपी नहीं जा सकती लड़कियों को जैसा उचित लगे अपने जीवन के विषय में वे वैसा निर्णय लेने के लिए  स्वयं स्वतंत्र होंगी । 
   कुल मिलाकर दलितों को स्वयं इस योग्य बनना पड़ेगा कि कोई सवर्ण लड़की उनसे विवाह करना चाहे ! अन्यथा जो लड़की जिसकी ओर देखना न चाहे जिसके साथ उठना बैठना न चाहे जिसके आचार व्यवहार से घृणा करती हो ऐसे किसी स्वभाव विरुद्ध लड़के के साथ उस लड़की को वैवाहिक दृष्टि से फँसा देना कहाँ का न्याय है पहली बात तो ऐसी बातें कोई मूर्ख व्यक्ति ही कर सकता है जिसे समझ ही न हो कि वो बोल क्या रहा है । 
   वैसे तो लड़कियों का अपना आस्तित्व है अपना स्वाभिमान है अपनी इच्छा है वो जैसा चाहें वैसा निर्णय ले सकती हैं अपने जीवन के विषय में अगर वो माता पिता की इच्छा से भी विवाह करती हैं तो भी पसंद ना पसंद तो उनकी अपनी ही चलेगी और होना भी ऐसा ही चाहिए आखिर निर्वाह तो उन्हें ही करना होता है !फिर लड़कियों पर ऐसा दबाव कैसे डाला जा सकता है जिससे उन्हें अपना भविष्य बर्बाद होता दिखे !वैसे भी कोई सुयोग्य स्वाभिमानी सुशिक्षित कन्या अपना जीवन साथी चुनते समय इतना ध्यान तो रखेगी ही कि वो उसी के साथ जुड़े कि जिससे उसकी पद प्रतिष्ठा वैसे तो बढ़े किंतु यदि न भी बढ़ सके तो घटे भी न !
    कोई लड़की जब किसी आचार व्यवहार शिक्षा संस्कार स्वाभिमान विहीन व्यक्ति को अपना नौकर नहीं बनाना चाहती तो ऐसे व्यक्ति को पति कैसे बना लेगी !ऐसी आशा भी कैसे और क्यों की जाए !

 

Tuesday, 27 October 2015

गीता को स्नेह देना चुभा क्यों केजरीवाल जी ! ये क्या कह रहीं हैं आप की विधायक ! कृपया आप कुछ कहिए !!

    गीता की धर्म निष्ठा एवं राष्ट्र निष्ठा प्रशंसनीय !गीता को स्नेह देने में गलती क्या है? केजरीवाल जी !ऐसे प्राणियों को सँभाल कर रखिए !ऐसे समयों में ये शैली उचित नहीं है !
   "सुषमा जी ने नेतात्व छोड़कर बहन और माँ जैसी आत्मीयता दी है गीता को !इसके लिए उन्हें बधाई दी जानी  चाहिए !!"
"जितना सम्मान गीता को मिला है सरकार और मीडिया ने इतना सम्मान तो कभी शहीदों को नहीं दिया है -अलका लाँबा "
     किंतु अलका जी !  यहाँ गीता  की कमाई किसी को नहीं खानी है और न ही वो  कोई बहुत बड़ी राजनायिक हैं जिस कारण उनकी इतनी चाटुकारिता कर रही है सरकार ! 
  अलका जी  ! बुरा मत मानना किंतु यदि तुमने भी इस प्रकरण को भारतीय संस्कृति या महिला हृदय की आँखों से देखा होता तो शायद चुभता नहीं !ये राजनैतिक आँखों से आत्मीय व्यवहार नहीं देखे जा सकते !
      अलका जी ! वैसे भी गीता के साथ किए गए व्यवहार को सम्मान नहीं अपितु स्नेह कहते हैं जो हर माता पिता नाते रिश्तेदार गाँव घर के लोग अपनी बच्चियों से  करते हैं ये अपनी संस्कृति रही है जो आज लुप्तप्राय होने लगी थी जिसे प्रेसवार्ता के बीच सुषमा जी के हावभावों से जीवित होते  देखा गया है उस समय सुषमा जी नेता बिलकुल नहीं लग रही थीं उनके चेहरे  पर जो ख़ुशी थी वो एक नेता के चेहरे पर हो ही नहीं सकती नेताओं के हृदयों में इतनी मृदुता कहाँ पायी जाती है वहाँ तो सबकुछ बनावटी करना होता है किंतु सुषमा जी का एक एक हाव भाव एक एक शब्द विन्यास वास्तव में सराहनीय था !इस विषय में पाक सरकार की सराहना में कहे गए वो सधे संतुलित तथा आत्मीय एवं उनके अच्छे कामों के लिए उत्साह बर्द्धक शब्द बहुत सुंदर लग रहे थे । इस विषय में वे वास्तव में भारतीय संस्कृति का परिचय देने में सफल रहीं ! काश ! देश में यही भावना सभी के मन में सभी बहन बेटियों के प्रति आ जाए तो माताओं बहनों की सुरक्षा के लिए क्यों हमें  गिड़गिड़ाना पड़े पुलिस के सामने !
   

Saturday, 24 October 2015

लोकतंत्र छोड़कर 'तंत्र 'की ओर क्यों भागे नीतीश ? क्या लोकतंत्र पर भरोसा नहीं रहा !!

बिहार लोकतंत्र की ताकत से चलेगा या तंत्र की ?ये निर्णय करे बिहार! 
 नितीश जी ! आप केजरीवाल की नकल करते करते तांत्रिकों के चक्कर काटने वाली लालू जी की नक़ल कब से करने लगे ! नितीश जी ! तंत्र  या लोकतंत्र ?भरोसा आपका किस पर है ? 

   तंत्र का मतलब है अनुशासन !प्रायः तांत्रिक लोग सबको अपने अनुशार चलाना चाहते हैं जबकि लोकतंत्र में जनता के अनुशार चलना होता है !ऐसी परिस्थिति में कोई लोकतान्त्रिक मुख्यमंत्री किसी तांत्रिक के यहाँ जाकर क्या करेगा !
      अपनी छवि चमकाने के लिए केजरीवाल ने अपना मंत्री बरर्खास्त किया तो नितीशकुमार ने भी अपना कर दिया  कि इसमें कोई तो अच्छाई होगी अन्यथा केजरीवाल जी ऐसा क्यों करते !
  केजरीवाल जी ने अपनी पार्टी और सरकार  की भद्द पिटती देख एक मंत्री को बर्खास्त कर दिया था ताकि लोगों का ध्यान उधर चला जाए और भूल जाएँ 'आप' सरकार की नाकामियाँ ! इधर नितीश जी ने वोटिंग के एक दिन पहले अपनी  सरकार की साफ सुथरी छवि दिखाने की कोशिश इसीप्रकार से की !
    हे नितीश जी !दूसरों को बेईमान बताकर अपने को ईमानदार सिद्ध करने वाले लप्फाजों को जनता अब पहचान चुकी है दूसरों का स्टिंग करते करते स्टिंग लती आपिए अब आपस में ही करने लगे हैं एक दूसरे का स्टिंग !
    " जिस ट्रिक से अरविंद केजरीवाल जीते थे वही अपना रहे हैं नितीश कुमार - नवभारत"
किंतु केजरीवाल की नकल करके नितीश कुमार जी छोटी छोटी रैलियाँ कर रहे हैं सो तो ठीक है परंतु अपनी छवि चमकाने के लिए अपने एक कमाऊ मंत्री के साथ केजरीवाल की नकल करने के लिए ऐसा नहीं करना चाहिए था कि उन्होंने अपने मंत्री को धक्का मारा तो देखा दूनी आपने भी अपने मंत्री को मार दिया धक्का !केजरी वाल ने स्टिंग करवाया तो आनन फानन में नीतीश जी ने भी अरेंज किया स्टिंग ! नितीश जी ने जाते जाते अपनी सरकार के भ्रष्टाचार का एक छोटा सा पीस निकाल कर जनता के सामने परोस ही दिया कि लो देख लो जी हम कितने  ईमानदार हैं बिलकुल केजरीवाल जी की तरह इसलिए हमारे विषय में भी सोचिए बिलकुल दिल्ली की तरह !अब लालू जी की नक़ल कर रहे हैं नीतीश जी !

Friday, 23 October 2015

WEb

 Home 
परिचय 
ज्योतिष 


ज्योतिषहेल्प
विवाह और विवाह सुख
मकान और माकन सुख 

संतान और संतान सुख 
वाहन और वाहन सुख 
धन और धन सुख 
व्यापार और व्यापार सुख 
 वास्तु 
 जमीन या घर की परीक्षा !
जमीन के अंदर के दोष

भूमि शोधन विधि 
घर के समीप वृक्ष ,मंदिर  
भवन निर्माण नियम 
मंदिर ,रसोई और जल स्थान 
बने हुए मकान में वास्तु दोष 
 वास्तु पूजा विधान 

काउंसलिंग (एस्ट्रो )
एजुकेशन काउंसलिंग 
कैरियर - काउंसलिंग
मैरिज काउंसलिंग
बिजनेस काउंसलिंग
हेल्थ काउंसलिंग
स्ट्रेस डिप्रेशन
संपर्क 

दलितों ,मुस्लिमों ,महिलाओं के प्रति हमदर्दी दिखाने में गिद्धों की तरह टूटते हैं नेता लोग ! फिर भूल जाते हैं उन्हें !

दादरी गाँव कुछ दिन पहले नेताओं के लिए तीर्थ सा बन गया था फिर हैदराबाद फिर jnu ,बड़े बड़े नेता पहुँचने लगे jnu धाम ! 
   दलितों ,मुस्लिमों और महिलाओं को केवल  वोट बैंक क्यों समझते हैं नेता लोग !अब डॉक्टर साहब के प्रकरण यहाँ क्यों नहीं रूचि दिखा रहे हैं नेता लोग !
प्रायः नेता लोग इन्हीं तीनों की सुरक्षा की बात करके जीतते हैं चुनाव ! इन्हीं तीनों का विकास करने की  कसमें खाते हैं इन्हीं तीनों के विकास के लिए योजनाएँ बनाते हैं पास करते हैं और खुद खा जाते हैं पास हुआ सारा धन ।  दलित ,मुस्लिम और महिलाएँ रह जाते हैं देखकर ! इन लोगों से अपने हिस्से का कभी हिसाब नहीं माँगते हैं इसीलिए ये तीनों लोग नेताओं को बहुत पसंद हैं । चूँकि सवर्ण लोग इन नेताओं से पूछते हैं कि आपका घोषित धंधा क्या  है इस लिए सवर्णों से घृणा करते हैं ये लोग ! दलितों ,मुस्लिमों और महिलाओं के हक़ के धन की धमक ही है अरबों खरबों में खेला करते हैं नेता लोग !इनसे कौन पूछता है कि क्या हैं आपकी इतनी अच्छी आय के स्रोत ! 
 नेताओं के लिए तीर्थ सा बन गया है दादरी ! हर नेता पहुँचना चाहता है दादरीधाम ! बारे नेता लोग !!
   अखलाक की हत्या से नेता लोग वास्तव में दुखी हैं या इनके स्वार्थ कुछ और हैं !आखिर जाति  संप्रदायवाद की विदाई कब होगी इस देश से !
   बंधुओ !आम आदमी पार्टी की एक रैली में एक किसान ने आत्महत्या की थी उस समय जो केजरीवाल जी अपने समस्त  ग़णों के साथ न केवल मंच पर सुशोभित होते रहे अपितु भाषण भी चलते रहे किंतु वो दस कदम दूर उस फड़फड़ाते किसान के पास उस समय नहीं पहुँच सके वे भी दादरी न केवल पहुँच गए अपितु मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने जितना कुछ बोला उसमें देश के एक नागरिक की हुई हत्या जैसे जघन्य अपराधों की  निंदा कम थी ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भविष्य में क्या कुछ सावधानियाँ बरती जाएँ उधर उतना ध्यान नहीं था जितना हिंदू मुस्लिम पर टिका था आखिर क्यों ? 'अखलाक' हम सब लोगों की तरह ही देश के नागरिक थे !किंतु जितने भी नेता वहाँ पहुँच रहे हैं उन्हें केवल उनका मुस्लिमत्व आकर्षित कर रहा है आखिर क्यों ?अन्य बहुत नेताओं के बयान भी लगभग ऐसी ही भावना से भावित सुनाई पड़ते हैं । आज उस परिवार पर मुशीबत है इन नेताओं ने हाजिरी लगाने के चक्कर में उस पीड़ित परिवार को इतना  तंग कर दिया कि अंत में उन्हें इन कृत्रिम हमदर्दों के हाथ जोड़ देने पड़े कि इससे अधिक आपकी हमदर्दी अब हम  नहीं सह सकते !बंधुओ ! जिसे जाना था वो तो चला गया किंतु इस देश से जाति  संप्रदायवाद की विदाई नहीं हो सकी ! उसके लिए सामूहिक प्रयास होने चाहिए जो स्वर अभी तक सुनाई देना बाक़ी है ।
हिन्दू मुस्लिम क्यों ?देश के एक नागरिक की हत्या हुई है !
"दादरी मर्डर :PM मोदी अपने कार्यकर्ताओं को सँभालें - आजम -NBT "
किंतु आजम साहब ! घटना ग्रेटर नोएडा की है सरकार यू.पी.में आपकी है इसलिए कानून व्यवस्था बनाकर रखने की जिम्मेदारी आपकी है जिसमें आपकी सरकार नाकाम रही है । इसमें मोदी जी का नाम घसीट कर आप घटना की गंभीरता को कम कर रहे हैं जो ठीक नहीं है । आपको केजरीवाल की तरह लगता है कि मोदी जी की आलोचना करने से हमारी भी नेतागिरी चमक उठेगी और हमारी भी गणना बड़े नेताओं में होने लगेगी ।किंतु हे नेताजी ! ऐसे लोमहर्षक कांडों का राजनीति करण करने की प्रवृत्ति ठीक नहीं है आप राजनीति कहीं और कर लेना ! यहाँ तो देश के उस सम्मानित नागरिक के विषय में संवेदना पूर्वक व्यवहार करने का समय है जिसकी हत्या हुई है जिसके परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है जिन्हें रोते बिलखते देखकर मानवता दहल उठती है उन्हें हिन्दू मुस्लिम की दृष्टि से मत देखिए !उन्हें उस दृष्टि से देखिए कि अपने अपने काम से थका हारा पूरा परिवार सायंकाल घर पर इकठ्ठा हुआ होगा दिन भर के अपने अपने अनुभव एक दूसरे से कह सुन रहा होगा तभी अचानक अपने परिवार के सदस्यों के सामने मौत का सामना करना पड़ा होगा उसे ,बेबस परिवारवाले बेचारे देखकर रह गए होंगे !
आजम साहब ! आज आप मोदी जी की ओर इशारा कर रहे हैं कि वे अपने कार्यकर्ताओं को रोकें !अरे !आप कहना क्या चाहते हैं !क्या मोदी जी आपसे कहने आए कि आप अपने प्रदेश की कानून व्यवस्था न ठीक करें दोषियों पर कार्यवाही न करें !इसलिए यू.पी.सरकार निष्पक्ष रूप से राजधर्म का पालन करे !उसे जनता ने बिजयी बनाया है वो जनता को जवाब दे कि आपके प्रदेश में किसी परिवार को ऐसे दर्दनाक अत्याचार का सामना क्यों करना पड़ा !क्या करती रही आपकी सरकार और आप जैसे सरकार के सूरमा मंत्री !




Wednesday, 21 October 2015

क्या केवल साहित्यकारों और लेखकों की हत्या के खिलाफ हैं साहित्यकार !

     हर किसी का जीवन बहुमूल्य है , हत्या किसी की भी विरोध सामूहिक होनाचाहिए !मिलजुलकर ही निपटा जा सकता है मानवता के शत्रुओं से !
           " विचारकों और लेखकों की हत्या  लोकतंत्र के खिलाफ :विश्वनाथ त्रिपाठी "
      फरीदाबाद में एक परिवार के बच्चों को जिंदा जला देने की घटना क्या लोकतंत्र के खिलाफ नहीं है !एक साहित्यकार के ये कैसे उद्गार ! कुल मिलाकर  जिसका जितना विराट व्यक्तित्व होता है उसका परिवार भी तो उतना ही बड़ा होता है । ऐसे लोगों को सारा समाज अपना मानता है किंतु ऐसे लोग केवल अपनों को अपना मानें तो इनके लिए पराया कौन है !
      ये कैसा वक्तव्य !आश्चर्य !!क्या विचारकों और लेखकों के अलावा और किसी के जीवन का कोई महत्त्व नहीं है इनकी दृष्टि में !आज के पहले भी बहुतों को अत्याचारियों की बर्बरता की पीड़ा झेलनी पड़ी है किन्तु तब इतने आंदोलित क्यों नहीं हुए साहित्यकार !तब उनकी अपनी सरकारें थीं इसलिए आक्रोश प्रकट करना ठीक नहीं समझा गया या साहित्यकारों के अलावा समाज की पीड़ा पर उनका ध्यान ही नहीं था !साहित्यकारों की भावनाओं में इतनी संकीर्णता और ऐसी राजनीति !    
     माना कि साहित्यकार का जीवन बहुमूल्य होता है ऐसा समाज मानता है किंतु यदि साहित्यकार भी ऐसा ही मानने लगेंगे तो कैसे बचेगा समाज !क्या केवल साहित्यकार ही सँभाल लेंगे देश की सारी भूमिकाएँ !
     महोदय ! हत्या किसी की भी हो वह लोकतंत्र के खिलाफ ही होती है किंतु विद्वानों के मुख से नहीं शोभा देती है संकीर्णता !कोई सच्चा साहित्यकार केवल अपने या अपनों के लिए नहीं जीना चाहता  वो तो विराट समुद्र होता है जिसमें जाति क्षेत्र समुदाय संप्रदाय से ऊपर उठकर लोग अवगाहन कर सकें !
  इसी विषय में हमारे कुछ और लेख -
  • केंद्र सरकार के विरुद्ध बड़े बड़े समझदार लोग न जाने क्यों बनाने लगे हैं डरावना माहौल !seemore.... http://sahjchintan.blogspot.in/2015/10/blog-post_89.html 
  • साहित्यकारों और सरकारों के सहयोग से ही हो सकता है अच्छे समाज का निर्माण !आपसी विश्वास बनाए और बचाए रखना बहुत जरूरी !see more... http://bharatjagrana.blogspot.in/2015/10/blog-post_89.html 
  • साहित्यकारों का पुरस्कार पाना हो या लौटाना दोनों राजनीति से प्रेरित होते हैं ! अच्छा रहा   कबीर  सूर तुलसी मीरा जैसे साहित्यकारों को नेताओं ने कोई पुरस्कार नहीं दिया इसीलिए साहित्यकार के रूप में ही आजतक ज़िंदा रह सके हैं वे लोग !बंधुओ !जिन्हें पुरस्कार नहीं मिलता ऐसे साहित्यकार क्या सम्मानित नहीं होते !seemore.... http://bharatjagrana.blogspot.in/2015/10/blog-post_66.html
  • अरे पुरस्कार लौटाने वालो ! दुखी तो देशवासी भी हैं किंतु वो लौटावें क्या ?पुरस्कार उन्हें दिए नहीं गए ,बाजारों में मिलते नहीं हैं !पुरस्कार लेने का जुगाड़ उन्हें आता  नहीं है !see more.... 

     




 फरीदाबाद में एक परिवार के बच्चों को जिंदा जला देने की घटना क्या लोक तंत्र के खिलाफ नहीं है !कितना दुखदकांड है यह ! ऐसे और भी बहुत सारे दुर्भाग्य पूर्ण और दुखद काण्ड अक्सर देखने सुनने को मिला करते हैं क्या उनके विरुद्ध भी सामूहिक आवाज नहीं उठाई जानी चाहिए !किसकी आत्मा नहीं दहल जाती है जाती है

Tuesday, 20 October 2015

केंद्र सरकार के विरुद्ध बड़े बड़े समझदार लोग न जाने क्यों बनाने लगे हैं डरावना माहौल !

  अतीत के बड़े बड़े जातिसम्प्रदायवादी झंझावातों को जो लोग ख़ुशी खुशी झेलते रहे वो आज अचानक उन्मादित होते जा रहे हैं ऐसा हुआ क्या है देश में !
    अब समय आ गया है जब खोलने होंगे धीरे से अतीत के वे वातायन (झरोखे) ताकि कुछ हवाएँ उधर से भी आएँ जो सरकारें अतीत में केंद्र की सत्ता सँभालती रही हैं आखिर उनकी भी अच्छी बुरी आदतों को देश सहता रहा है किंतु वर्तमान केंद्र सरकार के विरुद्ध इतनी हुमस पैदा करने की कोशिश क्यों ?
    आखिर अतीत के बड़े बड़े जातिसम्प्रदायवादी झंझावातों को जो लोग ख़ुशी खुशी सहते गए वो आज बेचैन दिखें ऐसा हुआ क्या है! इतने विराट लोकतान्त्रिक देश में हमेंशा अच्छा बुरा कुछ न कुछ तो होता ही रहता है उसमें जो गलत है उसपर कानूनी कार्यवाही होती है अभी भी कानून उन्हीं पद्धतियों का पालन कर रहा है फिर आज अचानक कुछ लोग बेचैन क्यों होने लगे हैं !हमें याद रखना चाहिए कि वर्तमान सरकार भी संवैधानिक पद्धतियों की रीति नीति से ही बनी है इसलिए उसकी नियत पर शक करना उचित नहीं लगता इस सरकार में भी जिम्मेदार लोग हैं वो भी राष्ट्र भावना से भवित हैं वो भी देश वासियों के लिए बहुत कुछ करना चाह रहे हैं क्यों न करने दी जाए उन्हें भी उनके अनुशार देश सेवा !माना कि वर्तमान सरकार की लोकप्रियता से बेचैन कुछ विरोधी लोग करवा  रहे हैं जहाँ तहँ कुछ उपद्रव किंतु देश का कानून सक्षम है उनसे निपटने में !हमें भरोसा रखना चाहिए ! 

केजरीवाल जी ! पुलिस आपको दिल्ली की सुरक्षा के लिए चाहिए या 'आप' नेताओं का डर कम करने के लिए !

   " मोदी जी दिल्ली पुलिस हमें दीजिए'-केजरीवाल"
  किंतु अरविन्द जी !दिल्ली पुलिस भले ही अभी न हो आपके पास किंतु दिल्ली की चिकित्सा व्यवस्था तो आपके आधीन थी क्या कर पाए आप !आपकी छत्र छाया में खूब फूलता  फलता रहा डेंगू इस वर्ष ! डेंगू ने पिछले 19 सालों  का रिकार्ड तोड़ा है इस साल !केजरीवाल साहब ये है आपकी उपलब्धि !वो भी तब जब सैकड़ों करोड़ रुपए विज्ञापन के लिए पास किया था आपने ! उस पैसे से डेंगू रोकने के प्रयास  भी तो किए जा सकते थे जबकि समय से फागिंग तक नहीं हो सकी इस वर्ष !डेंगू तो वर्ष में एक बार आता है जब उससे ठीक से नहीं निपट सके आप तब पुलिस विभाग में तो रोज रोज नई नई समस्याओं से जूझना पड़ता है उससे कैसे निपट  सकेंगे आपके सुकोमल हाथ !
   केजरीवाल जी !आप क्या करेंगे दिल्ली पुलिस लेकर !पहले तो आप कहते थे हमें सिक्योरिटी नहीं चाहिए किंतु अब पुलिस पुलिस ही रटते रहते हैं दिन रात ! आखिर दिल्ली पुलिस माँगने के पीछे आपका उद्देश्य दिल्ली वालों की सुरक्षा करना है क्या ?या फिर आपकी पार्टी के कुछ नेताओं की हुई गिरफ्तारी के कारण बने दहशत के माहौल को कम करना है !इसके अलावा दिल्ली का क्या भला हो जाएगा दिल्ली पुलिस आपको देने से आप स्वतः समझाइए समाज को ?
ये लेख पढ़ने  के लिए   खोलिए ये लिंक -    

    केजरीवाल जी ! आप CM की बुराई करके CM तो बन गए किंतु क्या समझते हैं कि ऐसे ही PM की बुराई करके PM भी बन जाएँगे !see more.... http://sahjchintan.blogspot.in/2015/10/cm-cm-pm-pm.html


ऐसे काट"जुओं " को कब तक सहती रहेगी भारतीय संस्कृति !

" दाल-प्याज महंगी, गोमूत्र पियो, गोबर खाओः काटजू"

   किंतु ऐसे ही काटजूकुतर्क तो हर विषय में  गढ़े जा सकते हैं !'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' के विषय में भी काटजू कह सकते हैं कि "बेटों को न तो बचाओ और न ही पढ़ाओ" जनसंख्या नियंत्रण करने की स्कीमों का भी यह कह कर उपहास उड़ाया जा सकता है कि 'लोगों पर बम डाल दो' !आदि । इसी प्रकार  जो शिक्षित नहीं वो अशिक्षित ,जो ज्ञानी नहीं वो अज्ञानी ,ऐसे ही जो  बिल्डिंग विद्यालय नहीं है उसे मूर्खतालय कहने लगा जाएगा क्या ?जो बिल्डिंगें  न्यायालय नहीं है उन सारे भवनों को अन्यायालय कहा जाने लगेगा क्या ?

      हे सम्माननीय पूर्व न्यायाधीश महोदय !

शिक्षित-अशिक्षित , ज्ञानी-अज्ञानी, विद्यालय- मूर्खतालय न्यायालय-अन्यायालय जैसे शब्दों के बीच में भी बहुत कुछ छूट जाता है जरूरत उसे भी ध्यान रखने की है जो आपके बयानों में निरंतर चूक होती जा रही है !

    काटजूसाहब !आप ऐसे पद पर रह चुके हैं दूसरी बात वयोवृद्ध हैं और शिक्षित तो हैं ही आपके इस सारे गुणगौरव का सम्मान करना यदि समाज का कर्तव्य है तो इनकी गरिमा बचाए रखने की जिम्मेदारी आपकी भी है !गायों का सम्मान पूजन ,गोबर और गोमूत्र की महिमा का ज्ञान हमें वेदों पुराणों धर्मशास्त्रों से मिलता है इसलिए उनका उपहास उड़ाने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती देश में वो कितने भी बड़े पद पर क्यों न हो या रहा हो !

Sunday, 18 October 2015

केजरीवाल जी !

 मैं शीला दीक्षित नहीं हूं, - केजरीवाल
     किंतु केजरीवाल जी  ! शीला दीक्षित  आप हो तो सकते ही नहीं हैं उनका अभिनय करना भी आपके वश का नहीं है आज उनके किए विकास कार्य  उनका परिचय देने के लिए पर्याप्त हैं उनकी भाषा हमेंशा मर्यादित और संयमित रही उन्होंने कभी किसी नेता को चोर बेईमान नहीं कहा सबके सम्मान का ख्याल रखा इसलिए उनके आचरण की नक़ल कर पाना भी आपके वश का नहीं है इसलिए आप उनसे अपनी तुलना कैसे कर सकते हैं । उन्होंने दिल्ली वालों के लिए बहुत कुछ किया है और आपको बहुत कुछ करना बाक़ी है फिर आप ये कैसे कह सकते हैं कि हम उनसे अच्छा ही कर लेंगे !
see more...http://sahjchintan.blogspot.in/2015/10/cm-cm-pm-pm.html
 


केजरीवाल जी ! आप CM की बुराई करके CM तो बन गए किंतु क्या समझते हैं कि PM की बुराई करके PM भी बन जाएँगे !
         "मैं पीएम को चैन से सोने नहीं दूंगा- केजरीवाल"
    किंतु श्रीमान केजरीवाल जी ! PM बनने के बाद मोदी जी बूढ़े लगने लगे हैं जबकि आप जवान लगने लगे हो !जनता की चिंता किसको कितनी है ये चेहरे बता  रहे हैं और जनता समझ रही है !जनता को बुद्धू मत  समझिए !रही बात सोने  देने की तो केजरीवाल जी !तुम खुद ही भटके हुए राहगीर हो तुम क्या मोदी जी को नहीं सोने दोगे ! मोदी जी स्वयं साधक व्यक्ति हैं नींद और भोजन पर उनका अद्भुत नियंत्रण है ये दुनियाँ ने देख लिया है । CM साहब !आपतो केवल इतनी बात से खुश हो सकते हैं कि मोदी जी काम करते रहे फिर भी हम उन्हें बदनाम करते रहे !बेचारी जनता देखती see more...http://sahjchintan.blogspot.in/2015/10/cm-cm-pm-pm.html




साहित्यकारों का पुरस्कार पाना हो या लौटाना दोनों राजनीति से प्रेरित होते हैं !
 अच्छा रहा   कबीर  सूर तुलसी मीरा जैसे साहित्यकारों को नेताओं ने कोई पुरस्कार नहीं दिया इसीलिए साहित्यकार के रूप में ही आजतक ज़िंदा रह सके हैं वे लोग !बंधुओ !जिन्हें पुरस्कार नहीं मिलता ऐसे साहित्यकार क्या सम्मानित नहीं होते !
   साहित्यकार चाहे तो समाज को बदल सकता है किंतु आज सरकारें पुरस्कार देकर बदल दे रहीं हैं साहित्यकार !अपराध हो जाने पर सरकार किसी अपराधी के शरीर को उठा कर जेल में डाल सकती है फाँसी पर लटका सकती है किंतु सरकार किसी का मन नहीं बदल सकती है जबकि साहित्यकार मन भी बदल सकते हैं !ऐसे सक्षम साहित्यकार  यदि थान लें तो बदल सकते हैं समाज और रोक सकते हैं सभी प्रकार के अपराध और बलात्कार !  see more....http://bharatjagrana.blogspot.in/2015/10/blog-post_66.html





साहित्यकारों और सरकारों के सहयोग से ही हो सकता है अच्छे समाज का निर्माण !
      साहित्यकारों की जिम्मेदारी है कि वो समाज को जगाएँ और आपराधिक सोच पर अंकुश लगाएँ न कि पुरस्कार लौटाएँ और बेकार में सरकारों पर गुस्सा दिखाएँ ! समाज में अपराधिक सोच न पनपने देना  साहित्यकारों की अपनी जिम्मेदारी है । अपराध हो जाने पर कानूनी कार्यवाही करना सरकारों की अपनी जिम्मेदारी है इसलिए समाज में घटित होने वाले प्रत्येक प्रकार के अपराध को सरकारों पर डालकर साहित्यकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते !
        हमें याद रखना होगा कि सरकारों का शासन जनता के तनों अर्थात शरीरों तक ही सीमित होता है जबकि साहित्यकारों का सीधा प्रवेश जनता के मनों तक होता है साहित्यकार जनता के see more...http://bharatjagrana.blogspot.in/2015/10/blog-post_89.html

CM शीला दीक्षित जी की निंदा करके CM बने केजरीवाल अब PM की निंदा कर रहे हैं PM बनने के लिए !

   ऐसे तो कल कोई राष्ट्रपति बनने के लिए राष्ट्रपति जी की निंदा करने लगेगा !बारे केजरीवाल जी !
"'मैं पीएम को चैन से सोने नहीं दूंगा- केजरीवाल'"
    किंतु श्रीमान केजरीवाल जी ! PM बनने के बाद मोदी जी बूढ़े लगने लगे हैं जबकि आप जवान लगने लगे हो !जनता की चिंता किसको कितनी है ये चेहरे बता  रहे हैं और जनता समझ रही है !जनता को बुद्धू मत  समझिए ! 
    रही बात सोने  देने की तो केजरीवाल जी !तुम खुद ही भटके हुए राहगीर हो तुम क्या मोदी जी को नहीं सोने दोगे ! मोदी जी स्वयं साधक व्यक्ति हैं नींद और भोजन पर उनका अद्भुत नियंत्रण है ये दुनियाँ ने देख लिया है । CM साहब !आपतो केवल इतनी बात से खुश हो सकते हैं कि मोदी जी काम करते रहे फिर भी हम उन्हें बदनाम करते रहे !बेचारी जनता देखती रही !
    देशवासियों को दिए गए बचनों की चिंता मोदी जी को सोने नहीं देती है और केजरीवाल जी को कोई चिंता ही नहीं है ! मोदी जी सत्ता को भोगने नहीं आए हैं उन्होंने तो स्वयं को देश का सेवक माना है अन्यथा वो भी सैकड़ों करोड़ रुपए फूँक देते विज्ञापनों में और जनता का पैसा खर्चा करके करवा लेते अपनी प्रशंसा !किंतु जो काम करेगा वो प्रदर्शन क्यों करेगा !
   मोदी जी का काम ही उनका परिचय है जबकि केजरीवाल जी !आपने केवल अपनी तारीफ करवाने के लिए जनता की गाढ़ी कमाई के सैकड़ों करोड़ रुपए  विज्ञापनों के नाम से  दाँव पर लगा दिए हैं ! दूसरी ओर डेंगू से जूझते रहे दिल्ली के लोग फागिंग तक नहीं हो सकी समय से ,क्या आपके विज्ञापन की अपेक्षा ये काम ज्यादा जरूरी नहीं था किंतु आपको दिल्ली वालों की चिंता ही कहाँ है आप तो अपना चेहरा चमकाने में लगे   हुए हो !
    महोदय !आप कभी मोदी जी का और अपना चित्र PM और CM बनने के पहले और बाद का मिला लेना !पता लग जाएगा कि देश वासियों की चिंता किसे  कितनी है !
 मुझे विश्वास है कि आपकी जगह मोदी जी होते तो इतनी बड़ी धनराशि विज्ञापनों में खर्चा करने की अपेक्षा  डेंगू से निपटने की तैयारियों में लगाते वो धन ! किंतु ये अपेक्षा आप से कैसे की जा सकती है औरों को बदनाम करके खुद आराम करने के शौकीन केजरीवाल जी !आप तो कभी भी किसी पर भी कोई आरोप लगा सकते हैं किंतु मोदी जी को ऐसा करने में हिचक होगी ! आप को अपने अच्छे  कार्यों का भरोसा उतना नहीं होता है जितना कि दूसरों की बुराइयों का है ! आप CM की बुराई करके CM बन गए तो क्या समझते हैं कि   PM की बुराई करके PM भी बन जाएँगे !

मैं शीला दीक्षित नहीं हूं, - केजरीवाल
     किंतु केजरीवाल जी  ! शीला दीक्षित  आप हो तो सकते ही नहीं हैं उनका अभिनय करना भी आपके वश का नहीं है आज उनके किए विकास कार्य  उनका परिचय देने के लिए पर्याप्त हैं उनकी भाषा हमेंशा मर्यादित और संयमित रही उन्होंने कभी किसी नेता को चोर बेईमान नहीं कहा सबके सम्मान का ख्याल रखा इसलिए उनके आचरण की नक़ल कर पाना भी आपके वश का नहीं है इसलिए आप उनसे अपनी तुलना कैसे कर सकते हैं । उन्होंने दिल्ली वालों के लिए बहुत कुछ किया है और आपको बहुत कुछ करना बाक़ी है फिर आप ये कैसे कह सकते हैं कि हम उनसे अच्छा ही कर लेंगे !

Saturday, 17 October 2015

केजरीवाल जी की प्रसिद्धि

 केजरीवाल जी की प्रसिद्धि और बलात्कारों की वृद्धि 2011 के बाद लगभग साथ साथ ही हुई है ?तो इसमें पीएम और एलजी कहाँ से दोषी हो गए !
     2011के पहले तो न केजरीवाल इतने पॉपुलर थे और न ही बलात्कारों की इतनी घटनाएँ सुनाई पड़ती थीं !सबको बदनाम करके दिल्ली की सत्ता हथियाने वाले केजरीवाल जी को अब ये आदतें छोड़ देनी चाहिए आखिर सभी लोगों का दायित्व है कि मिलजुलकर प्रयास हों ताकि कन्याओं की  सुरक्षा हो सके !see more...http://sahjchintan.blogspot.in/2015/10/cm.html



पीएम और एलजी क्यों ?अपितु जिम्मेदार हैं CM ,रेप के विरुद्ध उन्होंने कितने चलाए जन जागरण अभियान !

 केजरीवाल जी की प्रसिद्धि और बलात्कारों की वृद्धि 2011 के बाद लगभग साथ साथ ही हुई है ?तो इसमें पीएम और एलजी कहाँ से दोषी हो गए !2011के पहले तो न केजरीवाल इतने पॉपुलर थे और न ही बलात्कारों की इतनी घटनाएँ सुनाई पड़ती थीं !सबको बदनाम करके दिल्ली की सत्ता हथियाने वाले केजरीवाल जी को अब ये आदतें छोड़ देनी चाहिए आखिर सभी लोगों का दायित्व है कि मिलजुलकर प्रयास हों ताकि कन्याओं की  सुरक्षा हो सके !        
" बच्ची से रेप की घटना 'क्या कर रहे हैं पीएम और एलजी'- केजरीवाल "

  किंतु केजरीवाल जी ! इसमें पीएम और एलजी'साहब क्या कर सकते हैं और उनकी जगह आप होते तो क्या कर लेते !जो अधिकार आपको मिले हैं उनका तो ठीक से संचालन आप  नहीं कर पा रहे हैं भाषणों बातों के अलावा जनता तक कुछ नहीं पहुँच पा  रहा है !  जहाँ तक बात बलात्कार की है तो पुलिस प्रशासन को करनी चाहिए कठोर कानूनी कार्यवाही !इसके अलावा आपराधिक सोच पर लगाम लगाने के लिए किए जाने चाहिए मजबूत प्रयास जो शिक्षक दीक्षक साहित्यकार एवं फ़िल्म निर्माता ही कर सकते हैं !किंतु केजरीवाल का पीएम और एलजी को  कटघरे में खड़ा कर देना इसके पहले अखलाक जैसे भारतीय नागरिक की हत्या को हिंदू मुस्लिम का रंग देने लगना केजरीवाल जी की मनसा पर सवाल उठाता है कि कहीं पीएम और एलजी साहब को बदनाम करने के लिए ही तो नहीं कराए जा रहे हैं ऐसे अत्याचार ! दिल्ली में घटित होने वाले हर अपराध की जाँच इस दृष्टिकोण से भी कराई जानी चाहिए क्योंकि बिना परिश्रम के राजनैतिक सफलता पाने के लालची शार्टकटी  नेता किया करते हैं ऐसी हरकतें !अन्यथा इतने कम समय राजनीति करके मुख्यमंत्री जैसा पद यूं ही नहीं मिल जाता है !

Friday, 16 October 2015

साहित्यकारों

साहित्यकारों और सरकारों के सहयोग से ही हो सकता है अच्छे समाज का निर्माण !
साहित्यकारों की जिम्मेदारी है कि वो समाज को जगाएँ और आपराधिक सोच पर अंकुश लगाएँ न कि पुरस्कार लौटाएँ और बेकार में सरकारों पर गुस्सा दिखाएँ ! समाज में अपराधिक सोच न पनपने देना साहित्यकारों की अपनी जिम्मेदारी है । अपराध हो जाने पर कानूनी कार्यवाही करना सरकारों की अपनी जिम्मेदारी है इसलिए समाज में घटित होने वाले प्रत्येक प्रकार के अपराध को सरकारों पर डालकर साहित्यकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते !
हमें याद रखना होगा कि सरकारों का शासन जनता के तनों अर्थात शरीरों तक ही सीमित होता है जबकि साहित्यकारों का सीधा प्रवेश जनता के मनों तक होता है साहित्यकार जनता के see more...http://bharatjagrana.blogspot.in/2015/10/blog-post_89.html
साहित्यकारों का पुरस्कार पाना हो या लौटाना दोनों राजनीति से प्रेरित होते हैं !
अच्छा रहा कबीर सूर तुलसी मीरा जैसे साहित्यकारों को नेताओं ने कोई पुरस्कार नहीं दिया इसीलिए साहित्यकार के रूप में ही आजतक ज़िंदा रह सके हैं वे लोग !बंधुओ !जिन्हें पुरस्कार नहीं मिलता ऐसे साहित्यकार क्या सम्मानित नहीं होते !
साहित्यकार चाहे तो समाज को बदल सकता है किंतु आज सरकारें पुरस्कार देकर बदल दे रहीं हैं साहित्यकार !अपराध हो जाने पर सरकार किसी अपराधी के शरीर को उठा कर जेल में डाल सकती है फाँसी पर लटका सकती है किंतु सरकार किसी का मन नहीं बदल सकती है जबकि साहित्यकार मन भी बदल सकते हैं !ऐसे सक्षम साहित्यकार यदि थान लें तो बदल सकते हैं समाज और रोक सकते हैं सभी प्रकार के अपराध और बलात्कार ! see more....http://bharatjagrana.blogspot.in/2015/10/blog-post_66.html

Wednesday, 14 October 2015

laloo

बेचारे लालू कैसे करें चुनाव प्रचार !

"लालू यादव को EC ने लगाई फटकार, कहा: जातिगत टिप्पणी को लेकर रहें सतर्क-एक खबर "
किंतु इस देश में जातियों के अलावा लालू जी को कुछ पता ही नहीं है तो बोलें अाखिर क्या !समाज को या तो उनकी जातियाँ बताकर सवर्णों के विरुद्ध भड़काते या विरोधी नेताओं को गालियाँ देते हैं और ये सब बंद करें दें तो बेचारे लालू कैसे करें चुनाव प्रचार !



लालू जी ! माँ शेरावाली को बचाना ही होता तो तुम्हारे शिर पर पंखा पटकती क्यों ?
"लालू जी पर गिरा पंखा,तो बोले मां शेरावाली ने बचा लिया - एक खबर"
लालू जी ! अभी तो वार्निंग देकर छोड़ दिया है माँ शेरावाली ने कि लालू जी अभी भी सुधर जाओ !अन्यथा वार्निंग ऐसी तो एक्सन कैसा होगा कल्पना कीजिए लालू जी !
लालू जी ! जितना ऊटपटाँग तुम बोलते हो गो हत्या का अप्रत्यक्ष समर्थन करते हो , दलितों को खुश करने के लिए सवर्णों पर सौ प्रतिशत झूठे आरोप लगाते हो !नवरात्र जैसे पवित्र पर्वों का लिहाज किए बिना 'बधिया' जैसे कितने गंदे गंदे शब्द बोलते हो ! आपकी ऐसी ही हरकतों से झल्ला कर माँ शेरावाली ने पटक दिया तुम्हारे ऊपर पंखा !







लालू की रैली में नहीं पहुँचे लोग -एक खबर
 किंतु चुनावों के समय नटों का खेल देखने कौन जाए ! ये तो लोकतंत्र के महान पर्व चुनावों का समय है इसमें बिहार का जनता जनार्दन बिहार का भाग्य बदलने में व्यस्त  है !डिस्टर्व न करो लालू जी ! शांत रहो ये समय मनोरंजन का नहीं है ।

               एक अपराधी की मदद से नितीश बनना चाह रहे हैं मुख्यमंत्री !
     मेरे प्रिय बिहारबासियो ! याद रखना कि भ्रष्टाचार मुक्त शासन तो ईमानदार लोग ही दे सकते हैं !
  बंधुओ ! किसी अपराधी के हाथों  में सत्ता देकर आप स्वच्छ और ईमानदार प्रशासन की उम्मींद कैसे कर सकते हैं जिसकी  अविश्वसनीय गतिविधियों के कारण उसे धक्का देकर चुनावों से बाहर धकेला गया हो वो बिहार को स्वच्छ प्रशासन देने की बात कर रहा है !

 जब वोट लेना हो तो दलित और पिछड़े और जब मुख्यमंत्री बनाना हो तो राबड़ी !
 बारे  दलित प्रेम ! लालूजी! ये ड्रामा अब जनता समझने लगी है कि लालू जी को चुनावों के समय दलित गरीब याद आ जाते हैं और जब मुख्यमंत्री बनना होता है तब दिखती हैं राबड़ी ! वोट माँगने हैं तो दलित गरीब याद आते हैं और जब पैसे इकठ्ठा करना हो तो अपने बेटा बेटी !लालू जी ! आपका नौवीं पास बेटा करोड़ों पति कैसे हो गया और बिहार के दलित और पिछड़े आज भी गरीब क्यों हैं ?

            दलितों की दुनियाँ उजाड़ने वाले लालू जैसे नेता वोट लेने के समय बन जाते हैं उनके हमदर्द !
 पशुओं का चारा हजम करने वाले ने दलितों पिछड़ों को बक्स दिया होगा क्या ? लालू जी !आखिर आपका धंधा रोजगार क्या है और वो करते कब हैं आप !आपकी सारी  संपत्ति आपके खून पसीने की कमाई है क्या !दलितों गरीबों पशुओं आदि के हक़ हजम करने वाले महापुरुष लालू जी ! आज घर भर घूम रहे हैं जहाजों पर चढ़े किसकी कमाई से !

Tuesday, 13 October 2015

केजरीवाल जी की राजनैतिक लीलाएँ और उनके भ्रष्टाचार विरोधी अवतार का प्रयोजन !!

   भूखों मरते रहे अन्ना जी और राजभोग रहे हैं गुरू जी !ये है नैतिकता भ्रष्टाचार विरोध सत्ता से विरक्ति आमआदमियत्व आदि आदि !भारी भरकम सिक्योरिटी सैकड़ों करोड़  के विज्ञापन ,विधायकों की वेतन वृद्धि जैसे राजभोग भोग रहे हैं ऐसा व्यवहार केजरी वाल बाबू जी ही कर सकते हैं !क्योंकि वो सादगी और ईमानदारी पसंद विचित्र प्राणी हैं !
  जिनसे मिलते ही जिनकी ईमानदारी देश सेवा आदि की बातें सुनकर देश भक्त लोग भाव विभोर हो उठते हैं और चल पड़ते हैं इनके साथ !किंतु इनसे छूटते ही किसी लायक नहीं बचते हैं वे देश भक्त !वे अपनी व्यथा न किसी से कह सकते हैं और न ही सह सकते हैं केवल कराहते रहते हैं । इसीप्रकार से महाराज जी के डसे हुए हुए लोग अर्धमूर्च्छित रूप में जीवन ढोते रहते हैं उनके भूतपूर्व सेवक ,सहयोगी साथी भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से जुड़े असंख्य लोग राजनैतिक तपस्वी साधू संत आदि !सुना है कि जिसे फाँसी दी जाती है उसकी भी अंतिम इच्छा पूछी जाती है किंतु आम आदमी पार्टी रूपी कारगार में कैदियों को नहीं  होता होगा इतना भी अधिकार !
    श्री केजरीवाल जी जैसे दिव्य प्राणी अन्ना जी जैसे किसी सीधे सादे व्यक्ति के शिष्य तो हो ही नहीं सकते वो तो जन्मजात गुरुरूप में ही पैदा हुए हैं !भूखों मरते रहे अन्ना और राजभोग रहे हैं गुरू जी !
    वैसे भी केजरीवाल जी खुद को आगे बढ़ाने के लिए दूसरों को बदनाम करते रहते हैं यही उनकी एनर्जी का सबसे बड़ा राज है साथ ही वो बड़ा आदमी बनने के लिए हमेंशा बड़ों को ही बदनाम करते हैं जैसे CM बनने के लिए CM को बदनाम करते रहते थे वैसे ही आज  PM बनने के लिए PM को बदनाम किया करते हैं इसके अलावा अपने को आगे बढ़ाने के लिए कुछ भी कर पाना उनके बश का भी नहीं है और अन्ना जैसे संत उनके लिए अपना बलिदान देने के लिए बार बार क्यों तैयार होंगे !वैसे भी उनका अब बुढ़ापा है । इसीलिए केजरीवाल जी को अब तो सहारा मात्र दूसरों को बदनाम करने का ही रह गया है उसी से जो कुछ मिले सो मिले ! और तो भगवान ही मालिक है । बंधुओ !इसीलिए आजकल यदि  केजरीवाल जी को जुकाम तक हो जाए तो सीधे मोदी जी को ठहरा देते हैं जिम्मेदार !
    ऐसे लोग खुद को ईमानदार दिखाने के लिए औरों को बेईमान सिद्ध करते रहते हैं अपने को शक्तिमान सिद्ध करने के लिए सही सरल सीधे गुणी ईमानदार एवं प्रतिक्रिया विहीन भले लोगों को धक्का देकर अपनी ताकत दिखाते हैं क्योंकि उन्हें पता होता है कि ये हमारे विरुद्ध कुछ करेंगे ही नहीं या कुछ कर ही नहीं सकते क्योंकि ये ईमानदारी सिद्धांतवादिता आदि आचार व्यवहारों को अपना आदर्श मानते हैं ये उससे समझौता नहीं कर सकते !
     केजरीवाल अपनी सिधाई सादगी सदाचरण सेवाभावना आदि प्रदर्शित करके अपने साथ जुड़े लोगों के हृदयों में उतरते हैं और वो ठीक ठीक से समझते हैं कि सामने वाले ने अभी तक क्या किया है आज क्या कर रहा है  और आगे क्या करना चाहता है ये तीनों बातें जानकर जो कर चुका है उसकी प्रशंसा कर देते हैं जो कर रहा है  उसकी व्यक्तिगत योजना की वैचारिक सर्जरी करके अपनी ओर मोड़ लेते हैं और जो उसके भविष्य के सपने हैं उन्हें अपनी नैतिकता आदर्श जनसेवा एवं ईश्वरवादिता आदि की तपस्या की कृत्रिम अग्नि में पिघला लेते हैं कुलमिलाकर सामने वाले को महत्त्वाकाँक्षा की दृष्टि से पहले नपुंसक बना लेते हैं फिर धीरे धीरे उसके अंदर ईश्वरीय भावनाएँ भरते हैं जब वो महत्वाकाँक्षा विहीन और इस दुनियाँ से विरक्त होकर आदर्शवाद के पथ पर चलते हुए स्वामी श्री श्री 1008 केजरीवाल जी महाराज के प्रति समर्पित होकर कार्य करने लग जाता है!ऐसे लोगों के सहयोग और समर्पण से जब एक पार्टी खड़ी होती है तब वही स्वामी श्री श्री 1008 केजरीवाल जी महाराज  अचानक  वो नैतिकता वो वैराग्य वो सादगी वो आम आदमीपन मिटने लगता है और सेठों साहूकारों राजाओं महाराजाओं की तरह केंचुल बदलने लगते हैं मुख्यमंत्री केजरीवाल !
   अब इनकी सादगी की हवाइयाँ उड़ रही होती हैं अब इन्हें महँगी गाड़ी महँगा घर सुख सुविधापूर्ण जीवन सिक्योरिटी आदि सब कुछ चाहिए होता है विज्ञापनों के नाम पर अपना चेहरा दिखाने के लिए सैकड़ों करोड़ का बजट पास करते हैं जो उनके अपने एवं अपनों की  संपत्ति बर्धन के काम आता है !ये सब देख सुनकर कर वो भूतपूर्व महत्वाकाँक्षामुक्त कार्यकर्ता केजरीवाल जी की चतुराई समझने लगता है और अपने भी पूर्व में विसर्जित कर चुका सपने फिर से सँवारने लगता है और अंदर ही अंदर उनसे सादगी के लिए संग्राम करने लगता है आखिर वो समाज को कैसे मुख दिखावे ! जब उसकी कोई सुनवाई ही नहीं होती है तब वो भी अपने शुष्क सपने फिर से हरे करने लगता है और बेचने लगता है वो भी अपनी सादगी और आदर्शवाद कमाने लगता है पैसा उन्हीं माध्यमों से जिनकी कभी निंदा किया करता था यह सब देखकर जब उसे ऐसा करने से रोका  जाने लगता है तब वो न केवल प्रकट करने लगता है अपनी दबी कुचली सुषुप्त इच्छाएँ अपितु उनकी पूर्ति के लिए उनसे करने लगता है दो दो हाथ !और जब ऐसा करने वालों की संख्या अधिक हो जाती है तो उन्हें बगावत भय से डाँटने की अपेक्षा फुसलाया जाता है और उनकी भी बढ़ा दी जाती है सैलरी किंतु कहाँ विज्ञापन के नाम पर हथिआए गए सैकड़ों करोड़ और कहाँ लाख दो लाख की  सैलरी !आखिर कैसे संतोष हो !ऐसी परिस्थिति में वो अपना धंधा जारी रखते हैं और उतर जाते हैं बगावत पर तब उनका कराया जाता है स्टिंग और धक्का देकर कर दिया जाता है पार्टी से बाहर !अब वो हक्काबक्का कार्यकर्ता मीडिया के सामने क्या कहे क्या छिपाए !अब कुछ क्षणों में ही छीन जाता है उसका मंत्रिपद पार्टी साथी प्रतिष्ठा आदि सबकुछ !अब वो मीडिया के सामने न तो रो पा रहा होता है और हँसने के लायक छोड़ा नहीं गया होता है !वो महामुनि की सादगी की पोल तो खोलना चाहता है किंतु उनके अधिकारों का भय होता है और उनके पास दबे छिपे अपने सीक्रेट खुल जाने का भय होता है !
         अथ श्री आमआदमी पार्टी की अवतार कथा 

आमआदमीपार्टी ' के नाम से लेकर ओढ़ी गई बनावटी सादगी तक किसी की नक़ल तो नहीं है !जानिए किसकी ?    हमारे इस लेख से लिए गए आम आदमी पार्टी का नाम और रीति रिवाज सादगी साधुता आदि आदि !और चुनाव जीतने के बाद भाग गई सारी सादगी ! देखा देखी में ओढ़ी हुई चीजें बहुत समय तक नहीं चल पातीं !हाँ यदि ये सादगी उनके अपने वास्तविक स्वभाव में होती तो सादगी इतनी जल्दी बोझ नहीं बनती !
    दूसरों को बेईमान और चोर बताने वाले ये आपिए खुद कितने ईमानदार हैं? वे कितना सच बोलते हैं,उनका रहन सहन क्या वास्तव में इतना ही सादगी पूर्ण है या अतीत में भी ऐसा ही रहा है?मेरा अनुमानित आरोप है कि  मेरे लेख से चुराई हुई आम आदमी की रहन सहन शैली का  अभिनय और आडम्बर मात्र करते हुए वैसा ही बनने और  दिखने का प्रयास अचानक किया जाने लगा है !अन्यथा ये सुख सुविधापूर्ण जीवन जीने वाले ,गाड़ियों से चलने एवं अच्छे अच्छे भवनों में रहने और महँगे महँगे स्कूलों में अपने बच्चे पढ़ाने वाले केजरीवाल एवं उनके साथी लोग रातोंरात आम आदमीsee more.... http://samayvigyan.blogspot.in/2015/07/blog-post_28.html

Monday, 12 October 2015

'आप' विधायकों और उनके परिवार वालों से मिले केजरीवाल,पढ़ाया ईमानदारी का पाठ-एक खबर

    किंतु ईमानदारी का पाठ अब क्यों पढ़ा रहे हैं केजरीवाल जी !आखिर अभी तक इसकी जरूरत क्यों नहीं समझी गई !जिस जनता ने आम आदमी पार्टी के प्रत्येक कार्यकर्ता को ईमानदार मान कर वोट दिया है वो जनता उसे ही बेईमान क्यों मान ले जिधर केजरीवाल अँगुली उठावें केवल इस लिए कि वे सरकार के सर्वे सर्वा  हैं !आखिर जो अधिकार विहीन पार्टी कार्यकर्ता केजरीवाल की ओर अँगुली उठा रहे हैं उन्हें ही सच क्यों न मान लिया जाए क्योंकि उनकी भी संख्या लम्बी है एक गलत हो सकता है सब नहीं !

   कार्यकर्ताओं की क्या गलती है जिन्होंने इस पार्टी को अपने खून पसीने से सींचा है आज उन्हें बेईमान बताकर दिखाया जा रहा है बाहर का रास्ता !क्या इसी दिन के लिए जुड़े थे वे पार्टी से ! ऐसी कृत्रिम ईमानदारी की भेंट चढ़ाए जाएँगे कितने और पार्टी कार्यकर्ता !

Sunday, 11 October 2015

सनातनी हिन्दू समाज कभी नहीं खाता था गोमांस !

   हिंदुओं को भटकने वाले लोग इधर उधर से नोच घसोट करके परोस रहे हैं अप्रमाणित आधा अधूरा इतिहास !ऐसे लोगों की सृष्टि विषयक कल्पना भी आधार हीन  है !
   हमारे हर धर्मग्रन्थ में शुद्ध खानपान की बात कही गई है और जीवों पर दया करने की बात समझाई गई है साथ ही अहिंसा को ही परम धर्म बताया गया है । गायों की रक्षा के लिए भगवान अवतार लिया करते थे ऐसे दया धर्म का पालन करने वाला सनातनी हिंदू समाज गोमांस खाता होगा ऐसा कहने वाले सौ प्रतिशत झूठ बोल रहे हैं !ये पांच छै हजार वर्ष पहले से ही सृष्टि मानने वालों की अज्ञान जन्य सोच है जबकि सनातनी हिन्दू समाज के पास लाखों वर्ष पुरानी सृष्टि होने के सुपुष्ट प्रमाण हैं ! 
   आयुर्वेद में जरूर अन्य जीवों के मांस के गुणों का वर्णन करते समय गोमांस के गुणों का वर्णन भी मिलता है किंतु गोमांस खाने का वर्ण कहीं नहीं मिलता !देश की परतंत्रता के समय कुछ ग्रंथों में कुछ श्लोक घुसाने की कोशिश की गई है जैसे गोमांस खाने सम्बन्धी बात ही है किंतु इन्हें पूर्वापर प्रमाणों से समझना चाहिए !जो सनातनीहिंदू समाज लहसुन प्याज जैसी चीजों से भी धर्म एवं पुण्यकृत्यों में परहेज करता रहा हो वो गोमांस कैसे खा लेगा !हमारे धर्म ग्रंथों में शुद्ध खान पान की हमेंशा प्रशंसा की गई है फिर यदि गोमांस ही खाना था तो शुद्धता किस बात की !!
    बंधुओ !यदि ऋषि मुनि गोमांस खाते होते तो परम्परया वो पृथा आज तक चल रही होती !दूसरी बात वो हमें गोपालन ,गो रक्षा ,गो सेवा जैसे पवित्र आचार व्यवहार सिखाकर क्यों गए होते !आखिर उनकी मजबूरी क्या थी ? दूसरी बात गायों की रक्षा के लिए भगवान अवतार लिया करते हैं ये बात वो हमें सिखाकर क्यों गए होते ! तीसरी बात  'सभी जीवों पर दया करो' ये उद्घोष क्यों किया गया होता 'अहिंसा परमो धर्मः 'उन्हीं का तो संदेश है ऐसे ऋषि वाक्यों को हिन्दू आज तक छाती से लगाए बैठा है ! आखिर गोमाँस खाना और जीवों पर दया करना दोनों काम साथ साथ कैसे किए जा सकते थे गोमांस पेड़ों में तो नहीं फलता था !

aam Aadmi party

 असीम अहमद  क्यों किए गए बर्खास्त जानिए  आप भी -पढ़िए हमारा पुराना  लेख बिना किसी एडिटिंग के - 
आमआदमीपार्टी के लिए शुभ नहीं हैं 'अ'अक्षर वाले नेतालोग ! भले ही वो अरविंद ,आशीष, आशुतोष जैसे नेता ही क्यों न हों लेनी उन्हें भी होगी विदाई !-ज्योतिष
आम आदमी पार्टी में निकलने और निकाले जाने का खेल तब तक यूँ ही चलता रहेगा जब तक 'अ' अक्षर से प्रारंभ नाम वाला एक भी व्यक्ति आम आदमी पार्टी  की प्रभावी भूमिका में रहेगा !-ज्योतिष  
म आदमी पार्टी हो या रविन्द केजरी वाल 'अ 'अक्षर ने कर रखा है सबका बुरा हाल !
आप स्वयं देखिए - शुतोष ,जीत झा,  अलकालांबा,शीष खेतान,अंजलीदमानियाँ ,आनंद जी,दर्शशास्त्री,सीम अहमद इसी प्रकार से जेश,वतार ,जय,खिलेश,निल,अमान उल्लाह खान  आदि और भी जो लोग हों 'अ' से प्रारम्भ नाम वाले वो कब किस बात को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना कर  पार्टी के कितने बड़े भाग को प्रभावित करके कितनी बड़ी समस्या तैयार कर देंsee more....http://jyotishvigyananusandhan.blogspot.in/2015/03/blog-post_11.html


आमआदमीपार्टी ' के नाम से लेकर ओढ़ी गई बनावटी सादगी तक किसी की नक़ल तो नहीं है !जानिए किसकी ?    हमारे इस लेख से लिए गए आम आदमी पार्टी का नाम और रीति रिवाज सादगी साधुता आदि आदि !और चुनाव जीतने के बाद भाग गई सारी सादगी ! देखा देखी में ओढ़ी हुई चीजें बहुत समय तक नहीं चल पातीं !हाँ यदि ये सादगी उनके अपने वास्तविक स्वभाव में होती तो सादगी इतनी जल्दी बोझ नहीं बनती !
    दूसरों को बेईमान और चोर बताने वाले ये आपिए खुद कितने ईमानदार हैं? वे कितना सच बोलते हैं,उनका रहन सहन क्या वास्तव में इतना ही सादगी पूर्ण है या अतीत में भी ऐसा ही रहा है?मेरा अनुमानित आरोप है कि  मेरे लेख से चुराई हुई आम आदमी की रहन सहन शैली का  अभिनय और आडम्बर मात्र करते हुए वैसा ही बनने और  दिखने का प्रयास अचानक किया जाने लगा है !अन्यथा ये सुख सुविधापूर्ण जीवन जीने वाले ,गाड़ियों से चलने एवं अच्छे अच्छे भवनों में रहने और महँगे महँगे स्कूलों में अपने बच्चे पढ़ाने वाले केजरीवाल एवं उनके साथी लोग रातोंरात आम आदमीsee more.... http://samayvigyan.blogspot.in/2015/07/blog-post_28.html

आमआदमी पार्टी की कृत्रिम ईमानदारी के ढहते स्तंभ !

आमआदमी पार्टी के विधायकों से अब नहीं ढोया जा रहा है राजनैतिक त्याग तपस्या का बनावटी ब्रह्मचर्य !see more... http://samayvigyan.blogspot.in/2015/07/blog-post_4.html

 

 मुख्यमंत्री जी !  असीमअहमद  को मुस्लिम समझकर बर्खास्त किया क्या ?
  पूर्व CMशीलादीक्षित की निंदा कर के CM बनने वाले केजरीवाल अब P.M.कर रहे हैं PM की निंदा !
 केजरीबवाल को मुख्यमंत्री पद क्या मिला वो तो बंदर के हाथ माचिस लग गई !
  अभी कुछ दिन पहले दादरी में एक परिवार पर कुछ लोगों ने हमला किया जिसमें एक व्यक्ति की जान चली गई जिसकी निंदा पूरे देश में हुई और पूरे देश की संवेदना उस परिवार के साथ थीं किंतु  वहाँ पहुँचे केजरीवाल इन्होंने उस भारतीय नागरिक की हत्या को भुनाने के लिए हिंदू मुस्लिमों की खाई खड़ी करनी प्रारम्भ की और कई बार हिन्दू मुस्लिम हिंदू मुस्लिम विवाद कह कह कर उकसाने की कोशिश की !
      बंधुओ !उसी प्रकार से असीम अहमद की बर्खास्तगी पर क्या यही कहा जा सकता है कि केजरीवाल के द्वारा मुस्लिम समझकर उसके साथ किया गया ऐसा षड्यंत्र और इस भ्रष्टाचार में सम्मिलित पार्टी पदाधिकारी भी रहे किंतु तलवार असीमअहमद के गले पर रख दी गई साथ ही उसकी जगह दूसरे मुस्लिम को बैठाकर  दो मुस्लिमों को आपस में भिड़ाने का षडयंत्र रचा गया !see more... http://samayvigyan.blogspot.in/2015/07/blog-post_2.html

अरे निर्दयी 'आप' नेताओ ! 
तुम कभी ये क्यों नहीं सोचते कि जब तुम्हारा गुजारा  हजारों लाखों में नहीं हो पा रहा है तो देश की गरीब जनता कैसे जी रही होगी इस महँगाई में जिसके पास हजारों की आमदनी भी निश्चित नहीं है !see more....http://sahjchintan.blogspot.in/2015/10/blog-post_52.html


सैलरी बढ़ाने के विरुद्ध होगा भयंकर आंदोलन परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें सरकारें !

  अरे नेताओ ! तुम देश की जनता को जीवन नहीं दे सकते तो जहर ही दे दो किंतु इतना जलील तो न करो ! 
  आम आदमी की कसमें खाने वालो!तुम भूल गए आम आदमियों को !see more .... http://sahjchintan.blogspot.in/2015/10/blog-post_85.html




दलितों में दम है तो अपना विकास करें ! आरक्षण के भरोसे पड़े पड़े सवर्णों को कोसते रहने से कुछ नहीं होगा !

    दलितों को जो ठीक लगे सो करें किंतु सवर्णों को बदनाम न करें सवर्णों ने इनका शोषण तो दूर इनसे एक कौड़ी भी नहीं ली है कभी ! बाकी ये जानें इनका काम जाने !   
    दलितों का शोषण न उस युग में हुआ था और न ही इस युग में हो रहा है ये लोग तरक्की न उस युग में कर पा रहे थे और न इस युग में कर पा रहे हैं उस युग में लोगों की कृपा पर गुजर बसर होती रही थी इस युग में सरकारी कृपा आरक्षण आदि के रूप में सहायक हो रही है परंतु किसी के कृपा पूर्वक किए गए अनुग्रह से दिन तो काटे जा सकते हैं किंतु तरक्की,सम्मान और स्वाभिमान नहीं बचाया जा सकता वो अपने परिश्रम से ही बचेगा !ये बात तो हमारे दलित बंधुओं को भी समझनी होगी !
     सवर्णों ने उस युग में किसी का शोषण किया  होगा यदि ये कल्पित बात मान भी ली जाए तो आजादी मिलने के बाद से आज तक के 67 वर्ष कम तो नहीं होते विकास करने के लिए !आखिर तब से तो बहुत दुलराए जा रहे हैं दलित !आरक्षण से लेकर सारी सुविधाएँ  दी जा रही हैं दलितों को !और हर पार्टी दलितों मुस्लिमों और महिलाओं का रोना धोना लेकर ही तो उतरती है चुनाओं में ,सवर्णों का तो कोई नाम भी नहीं लेता है और जो लेता भी है वो निंदा ही करता है सवर्णों की !फिर भी सवर्ण न केवल जिंदा हैं अपितु परिश्रम पूर्वक अपनी   तरक्की भी किए जा रहे हैं । इस प्रकार से सवर्ण लोग अपने पूर्वजों की ईमानदार परिश्रम शीलता का परिचय देते जा रहे हैं कि न शोषण उन्होंने किया था न हमने किया है उन्होंने भी परिश्रम पूर्वक कमाया था और हम भी परिश्रम पूर्वक ही  कर रहे हैं अपनी अपनी तरक्की !किंतु जो लोग हमारे पूर्वजों को तरक्की करते देख उस युग में उनसे ईर्ष्या कर रहे थे उन्हीं की संतानें आज हमारी तरक्की पर भी उसी प्रकार का शक कर रही हैं !राजनैतिक दल चुनाव जीतने के लालच में इन्हें वोट बैंक समझ बैठे हैं वो मिला रहे हैं इनकी हाँ में हाँ !किंतु सच्चाई कुछ और ही है इसीलिए अन्ना जी भी कह रहे हैं कि "आरक्षण देश के लिए बड़ा खतरा -अन्ना हजारे"
  बंधुओ ! देश के कुछ लोग मानते हैं कि वे तरक्की कर ही नहीं सकते इभी तो वे उसके लिए कोई प्रयास भी नहीं कर रहे हैं इसीलिए नेता उन्हें तरक्की कराने के नाम पर खुद भोग रहे हैं उनके हिस्से का आरक्षण और जीतते जा रहे हैं चुनाव !किन्तु जो लोग अपने बल पर तरक्की करना चाह रहे हैं उन्हें रोकने के लिए नेताओं ने  आरक्षण का बाँध बना रखा है ! आखिर आरक्षण को आगे करके देश को प्रतिभाविहीन बनाने का षड्यंत्र क्यों ?
    बंधुओ !अन्ना जी का कहना कहाँ तक सही है जानिए आप भी ! 
     आखिर तरक्की के पथ पर बढ़ती सवर्ण प्रतिभाओं के पैर क्यों बाँधे जा रहे हैं आरक्षण की रस्सियों से ! यदि सवर्ण बच्चे देश का गौरव बढ़ाएँ तो वर्तमान राजनेताओं को उनसे घृणा क्यों है देश की प्रतिभाओं को कोसना कहाँ का न्याय है उन्हें पकड़ कर रखना कितना उचित है !
क्या ये सही है ?
    यदि दलितों में दम नहीं है संघर्ष पूर्वक तरक्की करने की और सवर्ण कर लेते हैं तो उनकी प्रतिभा का सम्मान होना चाहिए न कि उन्हें रोकने के लिए आरक्षण की लगाम लगाई जाए !सवर्ण कहीं आगे न बढ़ जाएँ !ऐसी सोच ही गलत है !संभवतः इसी कारण से आरक्षण देश के लिए खतरा है !
प्रतिभा संपन्न सवर्ण भी देश की संपत्ति हैं उनकी उपेक्षा क्यों की जाए ?
    आरक्षण देश के सवर्णों के लिए खुली चुनौती है चूँकि देश के दलितों पिछड़ों के साथ सवर्णों के पूर्वजों ने जो कल्पित गद्दारी की है उसका दंड सवर्णों को भोगना  ही पड़ेगा !कहने का मतलब ये कि इस दकियानूसी भावना के कारण सवर्णों को विकास के पथ पर आगे बढ़ने से रोका जाता रहेगा!ऐसे अंधविश्वास की उपज है आरक्षण ,संभवतः इसी कारण से आरक्षण देश के लिए खतरा है !
संख्या में बहुत कम सवर्णों ने दलितों का शोषण कैसे किया होगा दलितों ने सहा क्यों होगा !इसलिए सवर्णों पर लगाया जाने वाला ये आरोप झूठा है !
    किंतु सवर्णों की संख्या दलितों से हमेंशा कम रही फिर वे दलितों का शोषण कैसे कर सकते थे और वे करते भी तो दलित सह  क्यों लेते !इतने बड़े जूठ की बुनियाद पर टिका है संभवतः इसी कारण से आरक्षण देश के लिए खतरा है !
"सवर्णों ने दलितों का शोषण किया था " इस झूठे जुमले की कमाई आखिर कब तक खाई जाएगी ? 
   बंधुओ !नक़ल करते हुए पकड़े जाने के कारण फेल हो जाने वाले विद्यार्थी जैसे अपने असफल होने का सारा दोष परीक्षा हाल में साथ बैठे विद्यार्थी पर मढ़ देते हैं ऐसी ही हरकत का शिकार हुए हैं सवर्ण !अन्यथा ऐसे विद्यार्थियों को दूसरे साल की परीक्षा में तो पास होना चाहिए था किंतु साठ साल से आरक्षण लेने के बाद भी फेल फिर भी दोषी हैं सवर्ण ! धिक्कार है ऐसी गिरी हुई सोच को !आखिर जिम्मेदार लोगों को अपनी कमी क्यों नहीं स्वीकार करनी चाहिए !संभवतः इसी कारण से आरक्षण देश के लिए खतरा है !
 'दालित्य' बीमारी के लिए पेनकिलर है आरक्षण !क्यों न खोजा  जाए इसका स्थाई इलाज !
    बंधुओ ! दलितों में ऐसी क्या बीमारी है कि वे सवर्णों की अपेक्षा कमजोर ही रहते हैं कितना भी आरक्षण रूपी घी पिला लो ! इसीलिए ये लोग अपनी तरक्की स्वयं नहीं कर सकते जबकि सवर्णवर्ग के गरीब लोग भी अपनी तरक्की स्वयं करते हैं साठ वर्ष आरक्षण भोगने के बाद भी यदि ये पिछड़े ही रहे तो अब आरक्षण की समीक्षा हो साथ ही सरकार को इस विषय पर विश्व के वैज्ञानिकों को आमंत्रित करके स्वतंत्र रिसर्च करवाना चाहिए और पता लगाना चाहिए कि वास्तव में इनमें बीमारी क्या है ?और उसका इलाज क्या  होना चाहिए अन्यथा विश्व के विकसित देश कहीं बोझ समझ कर इनका प्रवेश ही अपने यहाँ न बंद कर दें !इसलिए समय से इस बीमारी का प्रापर इलाज होना चाहिए अन्यथा आरक्षण रूपी पेनकिलर देकर टाली गई बीमारी कहीं नासूर न बन जाए !संभवतः इसी कारण से आरक्षण देश के लिए खतरा है !
आरक्षण की आड़ में बढ़ा है भ्रष्टाचार !कौड़ी कौड़ी के नेता करोड़पति हो गए !
      दलितों के अधिकारों के लिए हो हुल्लड़ मचाने वाले नेताओं की संपत्ति की जाँच किसी सक्षम एजेंसी से करवानी चाहिए कि जब ये दलित हितैषी लोग राजनीति में आए थे तब इनके पास संपत्ति कितनी  थी उसके बाद इन्होंने ऐसा क्या धंधा व्यापार किया अर्थात इनकी आय के स्रोत क्या रहे जो आज अरबों खरबों की संपत्ति उनके पास बनी कैसे !कहीं ये दलितों के नाम पर हुल्लड़ मचा मचा कर अपने घरों को ही तो नहीं भरते रहे !और यदि ऐसा है तो उनसे छीन कर दलितों के हक़ दलितों को दिलाए  जाने  चाहिए !इसी प्रकार से आरक्षण के नाम पर दलितों के हमदर्द नेता आगे भी कर सकते हैं धोखाधड़ी !संभवतः इसी कारण से आरक्षण देश के लिए खतरा है !
आरक्षण दलितों की क्षमता पर सबसे बड़ा प्रश्नचिन्ह  !
     जो दलित वर्ग अपने बल पर अपना घरबार नहीं चला सकते अपनी रसोई और परिवार चलाने के लिए आरक्षण माँगा करते हैं ऐसे लोगों की क्षमता पर प्रश्न उठने स्वाभाविक हैं लोग सोच सकते हैं कि इन्हें चुनाव लड़ाने का क्या औचित्य !यदि ये जीत भी जाएँगे तो अपने दायित्व का सम्यक निर्वाह कर पाएँगे इस पर भरोसा कैसे किया जाए !जो घर नहीं चला सकते वे विधान सभा लोक सभा अपना दायित्व कैसे निबाह पाएँगे !संभवतः इसी कारण से आरक्षण देश के लिए खतरा है !
आरक्षण किसी भीख से कहाँ अलग है और भिक्षुक का सम्मान कहाँ रह जाता है !
     आरक्षण दान तो है नहीं जो हमेंशा चलता रहे !ये तो बिना माँगे मिले तो सहयोग और माँगने पर मिले तो भिक्षा !किंतु सहयोग हो या भिक्षा लेने की भी तो कोई सीमा होनी चाहिए अन्यथा रोज रोज मुख उठाए सरकार के  दरवाजे पर खड़े रहोगे तो सम्मान नहीं रह जाता !इस प्रकार से आरक्षण जितने दिन आगे बढ़ाया जा रहा है उतने दिन दलितों का सम्मान दाँव पर लगाया  जा रहा है !संभवतः इसी कारण से आरक्षण देश के लिए खतरा है !
दलितों को आत्म सम्मान के लिए जागरूक क्यों न किया जाए !
     सुना है कि दलितों को पहले कभी वेद नहीं पढ़ने दिए गए इसलिए उनका विकास नहीं हो सका या उन्हें अछूत माना जाता रहा इसलिए उनका विकास नहीं हो सका !इस विषय में दलित बंधुओं से मेरा विनम्र निवेदन है कि अब आप वेद पढ़िए और कीजिए अपना विकास साथ ही सवर्णों को अछूत घोषित कर दीजिए और मत रखिए सवर्णों से अपनी रोटी बेटी के संबंध !आखिर कुछ स्वाभिमान तो अपना भी होना चाहिए ।मित्रो !किसी भी प्रकार का आरक्षण स्वाभिमान नहीं रहने देता है ,संभवतः इसी कारण से आरक्षण देश के लिए खतरा है !
आरक्षण को चुनावजीतने का साधन क्यों बनाया जाए ?
     बंधुओ !  जो नेता लोग किसी लायक नहीं होते बिलकुल कामचोर मक्कार लोग भी चुनाव जीतने के लिए सवर्णों को गालियाँ देना शुरू कर देते हैं और दलितों की हमदर्दी दिखाते हुए सवर्णों से लड़ने को तैयार दिखते हैं किंतु अपनी राजनैतिक पार्टियों में या सरकारों में दलितों को कोई सम्मान मिलने लायक या निर्णायक पद कभी नहीं देते हैं और चुनाव जीतने के बाद दलितों के हित  के नाम पर जो भी संपत्ति पास करवा पाते हैं वो सब अपने एवं अपने नाते रिश्तेदारों में बाँट लेते हैं ऐसे कामचोर मक्कार नेताओं के निठल्ले लड़के तक बिना कुछ किए धरे करोड़ों अरबों पति हो जाते हैं और दलित जहाँ के तहाँ बने रहते हैं !संभवतः इसी कारण से आरक्षण देश के लिए खतरा है !
      किसी को दलित क्यों कहा जाए ?
  आनाज के किसी दाने के दो टुकड़े हो जाएँ तो वो 'दाल' कहे जाते हैं किंतु जब उसी दाने के छोटे छोटे बहुत टुकड़े कर दिए जाएँ तो उन्हें 'दलिया' कहा जाता है इसी 'दलिया' को 'दलित' कहा जाता है !बंधुओ !क्या ये सही है कि किसी हँसते खेलते स्वस्थ शरीरों वाले किसी परिश्रमी वर्ग को दलित कहा जाए !ऐसा कहने के पीछे का भाव क्या रहा होगा !दलिया का मतलब कुचला हुआ आनाज या टुकड़े किया हुआ आनाज !
   भारत के एक सम्मानित वर्ग को ऐसे अशुभ सूचक नामों से बुलाया जाए उसकी ऐसी पहचान बनाई जाए ये कहाँ का न्याय है !मेरी समझ में तो ये समस्त मनुष्य जाति  का अपमान है कि उसे जीते जी टुकड़ों में विभाजित बता दिया जाए !ऐसे कल्पित दालित्य को आरक्षण का आधार बनाया जाना वास्तव में देश के लिए खतरा है !

   अन्ना हजारे जैसे बड़े समाज सुधारक को भी अब लगने लगा है कि आजादी के समय गरीब तबके को आगे लाने के लिए आरक्षण की आवश्यकता थी किंतु आरक्षण की भूमिका अब समाप्त हो गई है इतने दिन तक आरक्षण के सहयोग से जिन्हें आगे बढ़ना था वे बढ़ गए किंतु जो लोग आरक्षण का भोग करने की भावना से इसे आजीवन बनाए  रखना चाहते हैं वो ठीक नहीं हैं संभवतः इसी कारण से आरक्षण देश के लिए खतरा है !