Friday, 31 July 2020

विश्व का मौसम पूर्वानुमान -अगस्त :2020

 विश्व का मौसम पूर्वानुमान -अगस्त :2020
     भारत समेत विश्व के अधिकाँश देशों में अगस्त का संपूर्ण महीना अत्यंत अधिक वर्षा कारक होगा|कुछ देशों प्रदेशों में तो इस महीने में वर्षा की मात्रा इतनी अधिक होगी कि पिछले सौ वर्षों में संभव है इतनी अधिक बारिश न हुई हो|वर्षा के इस रौद्र रूप से भारत भी अछूता नहीं रहेगा !कुछ देशों प्रदेशों में भीषण बाढ़ का  दृश्य अत्यंत अधिक डरावना हो सकता है|इससे बचाव के लिए सरकारों के द्वारा किए जाने वाले अधिकतम प्रयास भी जनधन की हानि को संपूर्ण रूप से रोक पाने में सफल नहीं होंगे !
 1 अगस्त - फिलीपींस में तूफ़ान एवं अतिवर्षा तथा तेज आँधी तूफान की संभावना है |
 4 अगस्त - फिजी में भीषण वर्षा एवं चक्रवात जैसी घटनाओं के घटित होने की संभावना है |
 12अगस्त- अफ्रीकी प्रायद्वीप के पूर्वी भाग को चक्रवाती तूफान के कारणप्राकृतिकसमस्याओं का सामना करना पड़ सकता है |
 15 अगस्त - अमेरिका के दक्षिणी राज्यों में तूफान, भारी बारिश और बाढ़ से बड़ी समस्या पैदा हो सकती है। इसका सबसे ज्यादा
असर टेक्सास, ओकाहोमा, शिकागो और डलास आदि राज्यों में हो सकता है |
16 अगस्त - संयुक्त अरब अमीरात के दुबई में भारी बारिश हो सकती है ।

17अगस्त -
फिजी में चक्रवाती तूफान होने की संभावना है |                                                                                                                       
19 अगस्त -बलूचिस्तान में भारी बारिश हो सकती है|मास्टुंग, किला अब्दुल्ला, केच, ज़ियारत, हरनई और पिशिन जिले विशेष अधिक प्रभावित हो सकते हैं | पाकिस्तान में  मूसलाधार बारिश की संभावना है |

18 से 25 अगस्त- के बीच   शिकागो. अमेरिका के दक्षिणी राज्य तूफान और भारी वर्षा से अधिक प्रभावित हो सकते हैं |
 24 से 26अगस्त के बीच ऑस्ट्रेलिया में बड़े तूफान एवं अधिक बारिश जैसी घटनाओं की संभावना है | पूर्वी ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन और क्वींसलैंड में भारी तबाही हो सकती है|
 28 से 30 अगस्त के बीच  स्पेन में भीषण बारिश और तूफान से संकट खड़ा हो सकता है | इससे देशभर में भारी बारिश एवं स्पेन के पूर्वोत्तर इलाके में बाढ़ की स्थिति बन सकती है |
 31 अगस्त - दक्षिणपूर्वी ब्राजील में मूसलाधार बारिश और तूफान की संभावना है | मिनास गैरेस राज्य के बेलो होरिजोन्टे जैसे क्षेत्र इससे विशेष अधिक प्रभावित हो सकते हैं |
 विनम्र निवेदन :-
       मौसम का पूर्वानुमान लगाने के नाम पर उपग्रहों रडारों से आँधी तूफानों एवं बादलों की जासूसी करने वाले लोगों को अभी तक ऐसी संभावित स्थिति के  विषय में कोई जानकारी नहीं है | उनके पास ऐसी कोई वैज्ञानिक विधि भी नहीं है जिसके आधार पर वे संभावित स्थिति का अनुमान लगा सकें | इसीलिए प्रकृति के स्वभाव को न समझने वाले मौसमवैज्ञानिक ऐसी प्राकृतिक आपदाओं से पहले इनके बिषय में अनुमान नहीं लगा पाते हैं उनके अज्ञान के कारण सरकारों को आपदा प्रबंधन के संसाधन जुटाने में समय लग जाता है अन्यथा यदि ऐसी प्राकृतिक आपदाओं का पूर्वानुमान आपदाओं के शुरू होने से पहले पता लग जाए तो सरकारें अधिक तैयारी के साथ समय से उपस्थित होकर अपने अपने देशों के जन धन की रक्षा कर सकती हैं |ऐसी प्राकृतिक घटनाओं का पूर्वानुमान न लगा पाने या मौसमवैज्ञानिकों के द्वारा लगाए हुए पूर्वानुमान गलत हो जाने के लिए 'जलवायुपरिवर्तन' को इसका कारण कब तक बताया जाता रहेगा !जबकि जलवायु परिवर्तन जैसा कुछ है ही नहीं जिसे सच बताकर उसके नाम  का हउआ खड़ा किया जा रहा है |
    इसलिए सरकारों को समय रहते ऐसे मौसम वैज्ञानिकों की खोज करनी होगी जो मौसमी  घटनाओं की जासूसी से ऊपर उठकर प्रकृति विज्ञान के माध्यम से प्रकृति के स्वभाव को समझने में सक्षम हों और जनता की आवश्यकताओं के अनुरूप अनुसंधान कर सकें अन्यथा यदि प्राकृतिक आपदाओं से लेकर कोरोना जैसी महामारियों से जनता को ही जूझना है तो ऐसे वैज्ञानिक अनुसंधानों को करने कराने की आवश्यकता ही क्या रह जाएगी !

Monday, 27 July 2020


एवं आवश्यक




भगवान् राम भी भरत 

विरोधियों की अच्छाइयाँ न होकर अपितु काँग्रेस की अपनी कमजोरियाँ हैं | वैसे जो कमियाँ हैं उन्हें तो पार्टी के बरिष्ठ लोग मिल जुलकर पता लगा ही लेते हैं और उसका समाधान भी निकाल लेते हैं किंतु कुछ ऐसी कमियाँ हैं जिनके बिषय में सभी लोगों को पता ही नहीं होता है






प्रधानमंत्री जी !
     महोदय !कोरोना जैसी महामारी किसी दवा या वैक्सीन से समाप्त नहीं होती है पहले भी कभी ऐसा हुआ नहीं है |महामारी का समय समाप्त होने पर महामारी स्वयं समाप्त होने लगती है उस समय कुछ लोग वैक्सीन या किसी दवा को  प्रचारित कर लेते हैं कि इससे महामारी समाप्त हुई है जबकि महामारी की समाप्ति में उसकी कोई भूमिका ही नहीं होती है ! 

       श्रीमान जी !महामारी को समझने का विज्ञान अभी तक विकसित ही नहीं किया जा सका है जिस विज्ञान के द्वारा महामारी के वास्तविक स्वभाव को समझा जा सकता है उसे सरकार विज्ञान नहीं मानती है |


     आदरणीय !महामारी समय के बिगड़ने से होती है और समय के सुधरने से ठीक होती है !विश्व के  वैज्ञानिक 'समय' के बिषय में अनुसंधान करना आवश्यक नहीं समझते इसलिए महामारी को समझाना उनके बश की बात ही नहीं है !वे केवल तीर तुक्के लगाते रहेंगे !जब समय आ जाएगा तब महामारी अपने आपसे ही समाप्त होगी !

     श्रीमान जी !भूकंप आँधी तूफान वर्षा बाढ़ बज्रपात एवं महामारी आदि समय बिगड़ने से शुरू होती हैं !आज बार बार भूकंप आ रहे हैं मई जून तक वर्षा होती रही है हिंसक आँधी तूफ़ान घटित हुए हैं हिंसक बज्रपात हुए हैं उसी गति से महामारी बढ़ती जा रही है ! आखिर इसी वर्ष ऐसा क्यों हो रहा है ?इनके  आपसी संबंध को समझने वाले वैज्ञानिक कहाँ हैं और जो समझते हैंसरकारें उन्हें वैज्ञानिक नहीं मानती हैं | 

    महोदय !भूकंप आँधी तूफान वर्षा बाढ़ बज्रपात आदि घटनाएँ भी कुछ कहती हैं यदि उनके द्वारा दिए गए संदेशों पर ध्यान दिया गया होता तो आज यह दुर्दशा शायद न होती !किंतु उनकी भाषा समझना आवश्यक समझा ही नहीं जा रहा है !

     आदरणीय !मौसम को ठीक ठीक समझे बिना महामारी को नहीं समझा जा सकता है और मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाले अभी तक सक्षम वैज्ञानिक तैयार ही नहीं किए जा सके हैं इसीलिए बड़ी बड़ी हिंसक प्राकृतिक घटनाएँ अचानक घटित होते देखी जाती हैं !उपग्रहों रडारों की मदद से बादलों आँधी तूफानों की जासूसी कर लेना मौसमविज्ञान नहीं है ! 

    प्रधानमंत्री जी ! आप भी उन्हीं लोगों की बातें सुनते मानते हो तो सक्षम प्रचारित प्रसिद्ध एवं प्रतिष्ठित होते हैं जबकि प्रकृति के स्वभाव को समझने वाले सिद्ध साधक सरकारी कार्यालयों में बैठे नहीं मिलेंगे !यह सच्चाई है !



जिस ताले को खोलना है उसी की ताली लगानी पड़ेगी दूसरी ताली से कैसे खुल जाएगा !


क्षमता विज्ञानं के पास का विज्ञान अभी

letter


 श्रीमान जी
               सादर नमस्कार 

विषय : कोविड -19 से संबंधित वैज्ञानिकअनुसंधानों की प्रक्रिया पर पुनर्बिचार करने हेतु निवेदन !

    महोदय !

       संक्रमण संबंधी रोगों से तथा भूकंप ,आँधीतूफ़ान एवं वर्षा बाढ़ जैसी प्राकृतिक दुर्घटनाओं से हरवर्ष लाखों लोग पीड़ित होते हैं उनमें से कुछ लोग मारे भी जाते हैं कोविड-19 जैसी महामारियों में तो बहुत लोग मारे जाते हैं किंतु संक्रमण के कारण होने वाले रोगों को एवं प्राकृतिक दुर्घटनाओं के बिषय में ठीक ठीक समझने के लिए अभी तक कोई विज्ञान विकसित नहीं किया जा सका है |इसीलिए इनका पूर्वानुमान लगा पाना अभी तक संभव नहीं हो सका है | 
      वैज्ञानिक अनुसंधानों की असफलता ही है कि इतनी बड़ी बड़ी महामारियाँ प्रारंभ होने से पहले इनके विषय में किसी को कुछ पता नहीं होता है इसलिए इनके बिषय में कोई तैयारियॉँ भी नहीं की गई होती हैं और ये धीरे धीरे सारे विश्व में फैल जाती हैं यदि इनके बिषय में समय रहते पूर्वानुमान लगाया जा सका होता तो ऐसे रोगों से निपटने की तैयारियाँ आगे से आगे की जा सकती थीं  |
      इन्हीं वैज्ञानिक अनुसंधानों की असफलता के कारण भूकंप,आँधीतूफ़ान,वर्षा, बाढ़ बज्रपात जैसी प्राकृतिक दुर्घटनाओं के घटित होने के 

ती हैं
     
     

इसकी शुरुआत मनुष्य के किसी प्रयास से नहीं होती इसलिए इसकी समाप्ति भी मनुष्य के किसी प्रयास से नहीं होगी !इसकी समाप्ति का समय आना अभी बाकी है !मैंने समय विज्ञान की दृष्टि से इस बिषय में अनुसंधान किया है !




 मौसम और महामारियाँ दोनों ही साथ साथ चलती हैं जब जैसा मौसम होता है तब तैसे रोग फैलते हैं मौसम में  यदि अधिक बदलाव आता है तो महामारी जैसी घटनाएँ घटित होने लगती हैं | मौसम समय के अनुशार चलता है दूसरी बात ऐसे बड़े रोग अपने समय से शुरू होकर और समय से ही समाप्त होते हैं |इसलिए ऐसी महामारियों के प्रारंभ होने और इनके समाप्त होने के समय का पूर्वानुमान लगाया जाना चाहिए | 
    इसके लिए आवश्यक है कि भूकंप ,तूफ़ान एवं वर्षा बाढ़ जैसी घटनाओं के घटित होने का कारण एवं उसका पूर्वानुमान लगाने वाले विज्ञान को विकसित किया जाए जो अभी तक नहीं किया जा सका है 

 जिनका कारण वैज्ञानिकों के द्वारा ऐसी अधिकाँश प्राकृतिक हिंसक घटनाओं के बिषय में पूर्वानुमान न लगा पाना होता है |ऐसी घटनाओं का पूर्वानुमान लगाने के लिए विश्ववैज्ञानिकों के द्वारा अभी तक कोई ऐसी वैज्ञानिक प्रक्रिया नहीं विकसित की जा सकी है जिससे प्रकृति में घटित होने वाली घटनाओं के स्वभाव को समझा जा सके और वर्षा बाढ़ एवं आँधी तूफानों के विषय में पूर्वानुमान लगाया जा सके | 
      उपग्रहों रडारों की मदद से समुद्री आकाश में बादल और आँधी तूफ़ान दिखाई पड़ जाते हैं वे जितनी गति से जिस दिशा की ओर जा रहे होते हैं उसी हिसाब से अंदाजा लगा लिया जाता है कि ये किस दिन किस देश या प्रदेश में पहुँचेगे !चूँकि आँधी तूफानों की तरह उपग्रहों रडारों की मदद से भूकंपों को नहीं देखा जा सकता है इसलिए भूकंपों के बिषय में ऐसा कोई अंदाजा लगाना भी संभव नहीं हो पाया है | 
    कोविड -19 जैसी महामारी से बहुत लोग पीड़ित हुए एवं काफी लोग मारे भी गए हैं किंतु अभी तक इस महामारी में होने वाले निश्चित लक्षण नहीं खोजे जा सके हैं इसका पूर्वानुमान लगाया जा सका है कि ये महामारी कब तक रहेगी |बिना किसी दवा वैक्सीन आदि के महामारी के संक्रमण से मुक्त होने वाले रोगियों की बढ़ती संख्या देखकर बहुत लोग इसकी दवा या वैक्सीन बनाने का दावा करते देखे जा रहे हैं जो इस महामारी के संक्रमण को और अधिक बढ़ाने में मददगार सिद्ध हो सकता है | 
      इस बिषय में मैंने एक ऐसी तकनीक बिकसित की है जिसके आधार पर महीनों वर्षों पहले घटित होने वाली वर्षा आँधी तूफ़ान एवं महामारियों के बिषय में पूर्वानुमान लगाया जा सकता है |उसी के आधारपर मेरा आपसे निवेदन है कि अभी 8 अगस्त 2020 से कोविड -19 का संक्रमण एक बार फिर बहुत अधिक बढ़ने लगेगा और 24 सितंबर तक दिनों दिन बढ़ता चला जाएगा इससे संपूर्ण विश्व प्रभावित होगा | 25 सितंबर 2020 से यह समाप्त होना प्रारंभ होगा जो दिनोंदिन कम होता चला जाएगा और 13 नवंबर को इसके बिलकुल समाप्त होने का समय होगा |
     इस तकनीक से इस बात का भी पता लगाया जा सकता है कि कोविड -19 प्राकृतिक है या नहीं,तथा यह किसी एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है या हवा में ही विद्यमान है !इसके लक्षण क्या हैं ?यह महामारी भविष्य में दोबारा कब आएगी और कितने महीने रहेगी !आदि बातों का एवं मौसम संबंधी प्राकृतिक घटनाओं का भी पूर्वानुमान लगाया जा सकता है | 
        

इनमें किसी दवा वैक्सीन आदि से कोई लाभ नहीं होता है | ऐसी महामारियाँ जब स्वतः समाप्त होने लगती हैं उस समय प्रयोग की जाने वाली औषधियों को क्रेडिट दे दिया जाता है जबकि 

महामारियों की दवा बन ही नहीं सकती है इनका केवल पूर्वानुमान लगाया जा सकता है कि ये शुरू कब होगी और समाप्त कब होगी | महामारियों का पूर्वानुमान लगाने से पहले मौसम संबंधी प्राकृतिक घटनाओं का पूर्वानुमान लगाने की व्यवस्था कारण होगी | क्योंकि महामारी के समय में बार बार भूकंप आ रहे हैं आँधी तूफान आ रहे हैं मई जून तक अधिक वर्षा होते देखी गई है इन सबका कोविड-19 के संक्रमण से सीधा संबंध है इस प्रकार की आशंकाएँ और भी बहुत लोगों को हैं किंतु महामारी एवं प्राकृतिक घटनाओं का पूर्वानुमान लगाने के लिए अभी तक कोई ऐसा विज्ञान नहीं खोजा  जा सका है जिसके आधार पर भूकंप,वर्षा,आँधी तूफान आदि के बिषय में पूर्वानुमान लगाया जा सके एवं इनके और महामारी के आपसी संबंध को समझा जा सके |  

Thursday, 23 July 2020

शांतवानपर्वत, चक्रकुंज पर्वत ,कुररीपर्वत , माल्यवानपर्वत ,वैकङ्कपर्वत -पूर्व ,
त्रिकूटपर्वत ,शिशिरपर्वत ,पतंगपर्वत ,रुचकपर्वत ,निषधपर्वत -दक्षिण
शिखिवासपर्वत , वैदूर्यपर्वत , कपिलपर्वत, गंधमादनपर्वत, जारुधिपर्वत -पश्चिम
शंखकूटपर्वत, ऋषभपर्वत, हंसपर्वत, नागपर्वत, कालंजरपर्वत -उत्तर    

Tuesday, 21 July 2020

trump

 श्रीमान जी
               सादर नमस्कार 

विषय : महामारियों से निपटने के लिए वैज्ञानिकअनुसंधानों की प्रक्रिया पर पुनर्बिचार करने हेतु निवेदन !

    महोदय !

       मौसम और महामारियाँ दोनों ही साथ साथ चलती हैं जब जैसा मौसम होता है तब तैसे रोग फैलते हैं मौसम में  यदि अधिक बदलाव आता है तो महा रोग या महामारी जैसी घटनाएँ घटित होने लगती हैं ऐसे बड़े रोग अपने समय से शुरू होकर समय से ही समाप्त होते हैं इनमें किसी दवा वैक्सीन आदि से कोई लाभ नहीं होता है | ऐसी महामारियाँ जब स्वतः समाप्त होने लगती हैं उस समय प्रयोग की जाने वाली औषधियों को क्रेडिट दे दिया जाता है जबकि महामारियों की दवा बन ही नहीं सकती है इनका केवल पूर्वानुमान लगाया जा सकता है कि ये शुरू कब होगी और समाप्त कब होगी | महामारियों का पूर्वानुमान लगाने से पहले मौसम संबंधी प्राकृतिक घटनाओं का पूर्वानुमान लगाने की व्यवस्था कारण होगी | क्योंकि महामारी के समय में बार बार भूकंप आ रहे हैं आँधी तूफान आ रहे हैं मई जून तक अधिक वर्षा होते देखी गई है इन सबका कोविड-19 के संक्रमण से सीधा संबंध है इस प्रकार की आशंकाएँ और भी बहुत लोगों को हैं किंतु महामारी एवं प्राकृतिक घटनाओं का पूर्वानुमान लगाने के लिए अभी तक कोई ऐसा विज्ञान नहीं खोजा  जा सका है जिसके आधार पर भूकंप,वर्षा,आँधी तूफान आदि के बिषय में पूर्वानुमान लगाया जा सके एवं इनके और महामारी के आपसी संबंध को समझा जा सके | 
    भूकंप ,तूफ़ान एवं बाढ़ जैसी घटनाओं में हरवर्ष लाखों लोग पीड़ित होते हैं उनमें से हजारों लोग मारे भी जाते हैं जिनका कारण वैज्ञानिकों के द्वारा ऐसी अधिकाँश प्राकृतिक हिंसक घटनाओं के बिषय में पूर्वानुमान न लगा पाना होता है |ऐसी घटनाओं का पूर्वानुमान लगाने के लिए विश्ववैज्ञानिकों के द्वारा अभी तक कोई ऐसी वैज्ञानिक प्रक्रिया नहीं विकसित की जा सकी है जिससे प्रकृति में घटित होने वाली घटनाओं के स्वभाव को समझा जा सके और वर्षा बाढ़ एवं आँधी तूफानों के विषय में पूर्वानुमान लगाया जा सके |
      उपग्रहों रडारों की मदद से समुद्री आकाश में बादल और आँधी तूफ़ान दिखाई पड़ जाते हैं वे जितनी गति से जिस दिशा की ओर जा रहे होते हैं उसी हिसाब से अंदाजा लगा लिया जाता है कि ये किस दिन किस देश या प्रदेश में पहुँचेगे !चूँकि आँधी तूफानों की तरह उपग्रहों रडारों की मदद से भूकंपों को नहीं देखा जा सकता है इसलिए भूकंपों के बिषय में ऐसा कोई अंदाजा लगाना भी संभव नहीं हो पाया है |
    कोविड -19 जैसी महामारी से बहुत लोग पीड़ित हुए एवं काफी लोग मारे भी गए हैं किंतु अभी तक इस महामारी में होने वाले निश्चित लक्षण नहीं खोजे जा सके हैं इसका पूर्वानुमान लगाया जा सका है कि ये महामारी कब तक रहेगी |बिना किसी दवा वैक्सीन आदि के महामारी के संक्रमण से मुक्त होने वाले रोगियों की बढ़ती संख्या देखकर बहुत लोग इसकी दवा या वैक्सीन बनाने का दावा करते देखे जा रहे हैं जो इस महामारी के संक्रमण को और अधिक बढ़ाने में मददगार सिद्ध हो सकता है |
       इस



तूफ़ान वर्षा जैसी घटनाएँ


भूकंपों समेत ऐसी सभी प्राकृतिक घटनाओं के बिषय में वैज्ञानिकअनुसंधानों के नाम पर दशकों से केवल बादलों एवं आँधीतूफानों की जासूसी मात्र करवाई जा रही है उसी को वैज्ञानिक अनुसंधानों के रूप में प्रचारित किया जा रहा है | उनके द्वारा की जाने वाली गलत भविष्यवाणियों के जलवायुपरिवर्तन को जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है जबकि जलवायुपरिवर्तन की सोच ही गलत तथ्यों पर आधारित होने के कारण ही जलवायुपरिवर्तन को अभी तक वैज्ञानिक तर्कों के आधार पर प्रमाणित नहीं किया जा सका है |
   यही स्थिति कोविड 19 संक्रमण के बिषय में भी है इसके बिषय में भी कुछ समझ पाने में वैज्ञानिक अभी तक  असफल रहे हैं इसी लिए इस महामारी के बिषय में उन्होंने आज तक जो जो कुछ बोला है वह सब झूठ होता रहा है | ये उनके द्वारा की गई ऐसी कुछ कल्पनाएँ मात्र थीं जिनका कोई वैज्ञानिक आधार न होने के कारण वे गलत होती चली जा रही हैं |चीन से निकला कोरोना सारे विश्व में फैलता चला गया उस पर कोई अंकुश नहीं लगाया जा  सका है जो सबसे बड़ी वैज्ञानिक असफलता है |
     कोविड 19 संक्रमण से विश्व के अधिकाँश देश पीड़ित हैं करोड़ों लोग संक्रमित हो चुके हैं और लाखों लोगों की मृत्यु भी हो चुकी है जबकि बिना किसी दवा या वैक्सीन के बहुत बड़ी संख्या में लोग स्वस्थ भी होते जा रहे हैं |
    महामारी का पूर्वानुमान लगाने से लेकर संक्रमित व्यक्ति के लक्षण पहचानने तक में वैज्ञानिक असफल रहे हैं |  इसकी चिकित्सा खोज पाने के बिषय में जिन वैक्सीनों के बिषय में बताया जा रहा है उनकी प्रमाणिकता अभी तक संदिग्ध है | कुलमिलाकर कोरोना के लिए अभी तक कोई दवा खोजी नहीं जा सकी है और आगे खोजी जा सकेगी इसकी भी कोई गारंटी नहीं है |
      जिस प्रकार से बिना किसी दवा या वैक्सीन के रोगी इतनी बड़ी संख्या में इस समय स्वस्थ होते देखे जा रहे हैं उसी प्रकार से बिना किसी वैक्सीन और दवा के ही एक समय ऐसा भी आएगा जब संक्रमण बढ़ाना बंद हो जाएगा और सभी संक्रमित रोगी स्वस्थ हो जाएँगे !उस समय जिस दवा या वैक्सीन आदि का प्रयोग किया जा रहा होगा उसे ही कोरोना से मुक्ति दिलाने वाली दवा या वैक्सीन के रूप में प्रमाणित मान लिया जाएगा |महामारियों के समय हर बार ऐसा ही होता है |
     इसलिए इस समय समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता इस बात की है कि ये कोरोना समाप्त आखिर कब होगा इसका पूर्वानुमान समाज को तुरंत बताया जाना बहुत आवश्यक  है जो अभी तक किए गए वैज्ञानिक अनुसंधानों से संभव नहीं है |
     इस बिषय में मैंने एक नै तकनीक विकसित की है जिसके द्वारा महामारियों और मौसम के स्वभाव को समझने में तो मदद मिलेगी ही इसके साथ ही साथ महीनों वर्षों पहले की घटनाओं के बिषय में पूर्वानुमान भी लगाया जा सकेगा |

       मौसम की तरह ही महामारी को
    
 

जिसमें विज्ञान की भूमिका दूर दूर तक दिखाई नहीं पड़ती है किए जा रहे हैं | |
   
          ऐसी परिस्थिति में उस जनता का क्या दोष है
 
सरकारें स्वास्थ्यसंबंधी अनुसंधानों पर खर्च करने के लिए जनता से टैक्स लेती हैं वही धन सरकारें जिन स्वास्थ्यसंबंधी अनुसंधानों को संचालित करने पर खर्च करती हैं


जिसके द्वारा किए


के लिए दवा या वैक्सीन बनाने

      ऐसी परिस्थिति में प्रश्न उठता है कि

स्वस्थ एक ओर तो कोरोना महामारी के संक्रमण फैलने से विश्व के अधिकाँश देश परेशान  हैं तो दूसरी ओर इसके बाद भी जिसके विषय में अभी तक ये नहीं बताया जा सका है ऐसी परिस्थिति में


मैंने कोरोना महामारी का पूर्वानुमान लगाने के लिए एक गणितीय नई तकनीक खोजी है जिसके द्वारा महामारी के घटने बढ़ने एवं समाप्त होने के बिषय में सही सही पूर्वानुमान लगाया जा सकता है | आज के पहले महामारी के विषय में जो पूर्वानुमान लगाए गए हैं वे सही घटित हुए हैं | 

 9 अगस्त 2020 से 24 सितंबर 2020 तक कोरोना संक्रमण बहुत अधिक बढ़ जाएगा !उस समय किसी वैक्सीन से कोई लाभ नहीं होगा !
   

Friday, 17 July 2020

भूमाफियाओं के विरुद्ध कठोर कार्यवाही क्यों नहीं की जाती है ?

   चोरों की चौकीदारी करने वाले खुद चोर निकले ! सरकार अपने पेड अपराधियों को सँभाल कर रख सके तो भी समाज शांति से जीवन बिता सकता है!अपराध करने वालों कर कोई शक नहीं करता जो अपराधी नहीं होते उन पर आरोप लगा दिए जाते हैं !आप स्वयं देखिए। ... "गश्त के दौरान सब इंस्पेक्टर ने चुरा लिया बेशकीमती पौधा, CCTV फुटेज से पकड़ी गई चोरी"see more... https://hindi.news18.com/news/nation/kerala-cop-steals-exotic-plant-with-colleague-help-cctv-helps-to-catch-culprit-3188743.html
प्रधानमंत्री जी !गरीबों किसानों का सहयोग करने के लिए आपको बहुत बहुत बधाई !
आप जनधन खातों में कुछ पैसे डलवा देते हैं तो कम से कम सरकारी अधिकारियों कर्मचारियों को घूस देने के लिए कुछ पैसे तो मिल जाते हैं अन्यथा छोटे छोटे कामों के लिए सरकारी विभागों के महीनों चक्कर काटने पड़ते थे !
 
 
अपराधियों से लोग उतने परेशान नहीं हैं जितने अधिकारियों से हैं !
अपराधियों से तो जनता निपट भी सकती है किंतु उन अधिकारियों से कैसे निपटे जिनके पीछे पूरी सरकार खड़ी होती है जब वो सताते हैं तब CM ,PM का भय भ्रष्टाचार मुक्त चुनावी वादा याद आ जाता है और आँसू निकल आते हैं !हाय ये भी ऐसे निकल गए !
 
 
और री अत्याचार करने लगते हैं से तो जनता निपट भी सकती लेती है
 
 
 जिस देश की पुलिस ऐसी हो उस देश के अपराधी कैसे होंगे !
see more.... https://twitter.com/i/status/1288007019249639426
 
 
पुलिस की कर्तव्यनिष्ठा पर सवाल !
  पुलिस अपराधियों को भले न पकड़ पाती हो किंतु शहरों में कोई रेड़ी पटरी वाला उनसे छूटता नहीं है जो किसी रोड चैराहे पर खड़ा होकर अपनी रोजी रोटी चलाने का इन्तिज़ाम कर रहा होता है पुलिस उससे दिहाड़ी लेने समय से पहुँच जाती है !उनसे पूछो तो कहते हैं ये पैसा ऊपर तक जाता है ऊपर वाले इतने बड़े भिखारी हैं !
 
 
 'फिरौतीफंड' जारी करे सरकार !
अपहरण करने वाले लाखों रुपयों की फिरौती माँगते हैं जो न दे पावे उसके परिजन मार दिए जाते हैं !इसलिए जिसका अपहरण हो सरकार उसके अकाउंट में 'फिरौतीफंड' के रूप में 1 करोड़ रूपए तुरंत ट्रांसफर कर दे ताकि वह फिरौती चुकाकर समय से सुरक्षित अपने घर पहुँच सके !

चुकाकर

जो सरकारी कर्मचारी नहीं हैं उनके पास इतना पैसा कहाँ होता है नहीं दे पाते हैं


 घूसखोरी रोकना सरकार के बश की बात नहीं है तो ऐसे विभागों में काम करने वाले अधिकारियों कर्मचारियों को  सैलरी देना ही बंद करे सरकार !यदि घूसखोरी भी चलनी है और सैलरी भी दी जानी है तो सरकारों की जरूरत क्या है लोग सुविधा शुल्क देकर अपने काम करवा ही लेंगे !

      सरकार के जिन विभागों में घूस दिए बिना काम हो ही नहीं सकता हैं ऐसा सभी मानते हैं उन विभागों के अधिकारियों कर्मचारियों की सैलरी बंद क्यों नहीं कर देती है सरकार !


अधिकारी और अपराधी एक सिक्के के दो पहलू होते हैं !
    अधिकारी ईमानदार कर्तव्य परायण हो तो उसके सामने अपराधी सरेंडर कर देते हैं और यदि अधिकारी घूसखोर भ्रष्ट डरपोक  होता है तो उसे अपराधियों के सामने सरेंडर कर देना पड़ता है | 

काम  करे तो अधिकारी और भ्रष्टाचार करे तो भ्रष्टाचारी !
    भ्रष्टाचारियों को अधिकारी बनाकर सरकारें समाज पर क्यों थोपती रहती हैं !जो न काम के न काज के केवल अपराधियों के साथ अपराधी गतिविधियों से धन कमाने की सांठगांठ में लगे रहते हैं !ऐसे अपराधियों को अधिकारी मानने का मन नहीं करता जो सरकारी विभागों में अधिकारियों की कुर्सियों पर बैठकर अपराध किया करते हैं | 

 ईमानदार अधिकारियों की संख्या कितनी है ?
   भ्रष्टाचार के बल पर सरकारी कार्यालयों में अधिकारियों की कुर्सियों पर यदि अपराधी न बैठाए  जाते तो अपराध मुक्त समाज का निर्माण किया जा सकता था !



अपराध अक्सर अपराधियों और सरकारी तंत्र की मिली भगत से होता है !
   ऐसी परिस्थिति में अपराध के लिए दोनों बराबर के जिम्मेदार होते हैं फिर इनकाउंटर एक का क्यों दोनों का क्यों नहीं ?

भूमाफियाओं के विरुद्ध कठोर कार्यवाही क्यों नहीं की जाती है ?
सरकारी जमीनों पर अवैध कब्ज़ा करके उसे बेच लेना गुंडों की आमदनी का मुख्य साधन है !इसलिए भूमाफियाओं के विरुद्ध कठोर कार्यवाही किए बिना गुंडा तंत्र को समाप्त नहीं किया जा सकता !यदि ऐसे गुंडों से सरकारों का फायदा नहीं है तो ऐसे लोगों के विरुद्ध कार्यवाही करने में सरकारें हिचकती क्यों हैं ?


अपराधियों का इनकाउंटर करने वाला सरकारी तंत्र सबसे बड़ा अपराधी है !
वो किसी अपराधी को तभी तक जीवित रखता है जब तक वो सरकारों नेताओं और अफसरों के फायदे के लिए काम किया करता है और जिस दिन वह ऐसा करना बंद कर देता हैवही सरकारी तंत्र उसी अपराधी का इनकाउंटरकर कर देता है |विकास दुबे के अलावा भी तो उत्तर प्रदेश में और भी अपराधी होंगे उन पर उसी तरह की कठोर कार्यवाही क्यों नहीं करती है सरकार !

विकास दुबे का इनकाउंटर अपराधियों के विरुद्ध पुलिस का आक्रोश था क्या ?
ऐसा करने के पीछे अपराधियों के विरुद्ध यदि पुलिस का आक्रोश होता तो कानून के कटघरे में खड़ा करके भी विकास दुबे को उसके कुकृत्यों की सजा दिलाई जा सकती थी किंतु विकास दुबे को कानून के कटघरे में खड़ा करके पुलिस प्रशासन के उन लोगों को सकुशल नहीं बचाया जा सकता था जो पिछले बीस वर्षों से विकास की मदद करने के लिए न्याय व्यवस्था को कलंकित करते रहे थे | इस मजबूरी के कारण विकास दुबे का इनकाउंटर करना सरकारी मजबूरी हो गई थी !इसलिए विकास दुबे का बध करके अपने को भय मुक्त कर लिया गया | नीति भी कहती है "आत्मानं सततं रक्षेद " !

कहीं विकास दुबे ने ही तो नहीं पलटा दी थी पुलिस की कार ?
विकास दुबे ने पहले से ही पुलिस के हथियार छीनकर भागने की योजना बना रखी हो इसीलिए मौका देखकर विकास दुबे ने ही कार पलटा दी हो !बेचारे पुलिस कर्मियों को चोट लग गई हो किंतु उसी कार में बैठे विकास ने कार पलटाते समय अपने चोट न लगने दी हो और पुलिस बेचारी घायल हो गई हो !इसलिए गुस्सा में उसका इनकाउंटर कर देने के अतिरिक्त और उपाय भी क्या था !मरता क्या न करता !!



योगी सरकार इनके भरोसे उत्तर प्रदेश को अपराध मुक्त बनाने के सपने देख रही है !
शक्तिशाली बिकास से पुलिस अपने हथियार नहीं बचा सकी !सरकार की अच्छे पाँवों वाली पुलिस विकास को भाग कर पकड़ नहीं सकी !दुर्दांत विकास से आत्मसमर्पण लिए गिड़गिड़ाती रही किंतु विकास दुबे इतना बड़ा क्रूर अपराधी था कि इन बेचारों पर उसे दया नहीं आई तब ये बेचारे क्या करते !उसे घेर कर मार डालना इनकी अपनी प्राण रक्षा के लिए आवश्यक हो गया था !



विकासदुबे को घेर कर मार डालने वालों को मिलना चाहिए बहादुरी पुरस्कार !
कार पलटी तो विकास दुबे को भी चोट लगी ही होगी इसके बाद भी वह लँगड़ा विकास पुलिस से हथियार छीन कर भाग खड़ा हुआ और पुलिस पर फायरिंग करने लगा !
यही न कि उत्तरप्रदेश पुलिस के इतने लोग अकेले विकास के सामने बेकार सिद्ध हुए !इन्हें अपनी जान बचाने के लाले पड़ गए तब बेचारे सरकारी बहादुरों ने विकास को पकड़ने के लिए नहीं अपितु विकास से अपनी प्राण रक्षा के लिए उस अकेले असहाय विकासदुबे को घेर कर मार डाला !इस बहादुरी के लिए उत्तर प्रदेश सरकार इन्हें लड्डू खिलावे इनका प्रमोशन करे और इन्हें पुरस्कार दे !



विकास दुबे के इनकाउंटर से टूटा है पुलिस पर से समाज का विश्वास !
आज कोई भी आरोपी पुलिस पर विश्वास यहाँ तक नहीं कर पा रहा है कि उसके साथ कहीं आए जाए यहाँ तक कि कोर्ट में पेश करते समय भी !


क्या इसलिए मार डाला गया विकास दुबे ?
विकास दुबे से पीड़ित समाज तो न्यायालय से कठोर सजा मिलने से भी खुश हो सकता था किंतु यदि इनकाउंटर न होता तो सबसे बड़ा नुक्सान पुलिस प्रशासन से जुड़े उस वर्ग का हो जाता जिसने पिछले बीस वर्षों में विकास की मदद कर कर के उसे इतना बड़ा अपराधी बनाया था !आज वो उनके भी नाम कबूलता और साक्ष्य भी उपलब्ध करवाता !केस चलने में पापों की सारी परतें खुलतीं | विकास को जब तक सजा सुनाई जाती तब तक उन अधिकारियों को डर डर कर जिंदगी काटनी पड़ती !आज वो बड़े बड़े ओहदों पर बैठे होंगे !इसलिए यह इनकाउंटर समाज के लिए हितकर नहीं कहा जा सकता !


उत्तर प्रदेश पुलिसकर्मियों की नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार की अपेक्षा है !
पुलिस भर्ती प्रक्रिया में अभ्यर्थियों को यदि उचित मानदंडों की कसौटी पर कसा गया होता तो विकास दुबे से निपटने के लिए परिष्कृत पुलिस पारदर्शिता पूर्वक आदर्श आचरण भी प्रस्तुत कर सकती थी !



उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती में रखे जाने चाहिए मध्यप्रदेश के कुछ होमगार्ड !
सरकार जनता के खून पसीने की कमाई से प्राप्त टैक्स के पैसों से जिन्हें सैलरी देती है आखिर किस लिए !



उत्तरप्रदेश पुलिस और मध्यप्रदेश का गार्ड !
जिस दुर्दांत विकास दुबे को मध्यप्रदेश का एक होमगार्ड काबू कर लेता है वही विकास दुबे उत्तर प्रदेश पुलिस की इतनी तैयारियों पर भारी पड़ जाता है !



विकास के हथियार छीनते समय पुलिस क्या कर रही थी ?
विकास दुबे ने पहले इनके हथियार छीन लिए ! फिर एक पैर का लँगड़ा विकास दुबे भागने में सफल हो गया ! विकास दुबे पुलिस पर फायर करने लगा ! जब विकास दुबे को ही सबकुछ करना था पुलिस के बस का कुछ था ही नहीं तब पुलिस वहाँ करने ही क्या गई थी !



उत्तरप्रदेश पुलिस के पराक्रम पर प्रश्न !
मध्यप्रदेश का एक होमगार्ड जिस खुंखार अपराधी को घेर कर पकड़ने में कामयाब हो जाता है मध्य प्रदेश पुलिस विकास दुबे को सकुशल अपनी सीमा पार करवा देती है ! उसे इतनी भारी भरकम तैयारियों से गई उत्तर प्रदेश पुलिस कानून के कटघरे में खड़ा कर पाने में असफल रही !

उत्तरप्रदेश पुलिस की सतर्कता पर प्रश्न !

विकास दुबे को अपने प्रदेश में ही घेर कर पकड़ पाती तब तो उसकी क्षमता का पता लग पाता किंतु वह ऐसा नहीं कर पाई इसीलिए तो वह मध्यप्रदेश पहुँचने में सफल हो गया !

उत्तरप्रदेशपुलिस की विश्वसनीयता पर प्रश्न !

2 और 3 जुलाई की रात को पुलिस के पहुँचने की सूचना विकास दुबे को स्वयं पुलिस ने दी !पुलिस के अपने लोगों ने गद्दारी की थी जिसे जनता हमेंशा भोगती है अबकी बार पुलिस को भी अपने महकमें की गद्दारी की कीमत चुकानी पड़ गई !
Edit

डॉ.शेष नारायण वाजपेयी updated his status.
उत्तरप्रदेश पुलिस की कर्तव्यनिष्ठा पर प्रश्न !
विकास दुबे को इतना बड़ा खुंखार अपराधी बनने से पहले उस पर अंकुश लगाया जाना चाहिए था उसे इतना बढ़ने का अवसर पुलिस ने दिया ही क्यों कि वो पुलिस पर भारी पड़ गया !

विकास दुबे केस !न रहेगा बाँस न बजेगी बाँसुरी !
अपराधियों से साँठ गाँठ रखने वाले अफसरों एवं नेताओं के विकास के साथ संबंधों के सबूत विकास के घर में खोजे जा सकते थे या फिर विकास से पूछकर पता लगाए जा सकते थे !अब ये दोनों ही मिटा दिए गए !

विकास दुबे की हत्या पर उठती शंकाएँ !
विकास दुबे केस !न रहेगा बाँस न बजेगी बाँसुरी !
अपराधियों से साँठ गाँठ रखने वाले अफसरों एवं नेताओं के विकास के साथ संबंधों के सबूत विकास के घर में खोजे जा सकते थे या फिर विकास से पूछकर पता लगाए जा सकते थे !अब ये दोनों ही मिटा दिए गए !

विकास दुबे की हत्या पर उठती शंकाएँ !
विकास दुबे की हत्या होते ही अचानक कटघरे में खड़ी हो गई कानून व्यवस्था !
विकास दुबे अपने अपराधों के लिए कल तक कटघरे में खड़ा था समाज की संबेदनाएँ पुलिस के साथ थीं किंतु आज अचानक बाजी पलट गई !समाज का प्रशासन के प्रति रवैया बदल गया !हर कोई विकास दुबे को अपराधी मानकर उसे कानून सम्मत सजा दिए जाने के पक्ष में था भले वो फाँसी ही क्यों न होती !

योगी जी ! विकासदुबे एक व्यक्ति नहीं एक प्रवृत्ति हैं उस प्रवृत्ति को रोकने के लिए भी कुछ कीजिए !

राजनीति में भी तो आपराधी हैं उनका चरित्रचिन्तन भी तो होना चाहिए !

सपा बसपा आदि सरकारों में जाति के आधार पर कार्यवाही की जाती रही है और जातियों के आधार पर ही प्रोत्साहन मिलता रहा है इसलिए कार्यवाही सब पर हो वे खनन माफिया हों या भू माफिया या राजनैतिक माफिया !छूटे कोई न योगी सरकार से ऐसी अपेक्षा है !

योगी जी ! विकासदुबे एक व्यक्ति नहीं एक प्रवृत्ति हैं उस प्रवृत्ति को रोकने के लिए भी कुछ कीजिए !
जनता पर अत्याचार करे तब अपराधी या पुलिस से खटपट हो तब ?

अपराधी जनता का उत्पीड़न करती रहे तब तक तो ठीक किंतु जिस दिन अपराधियों की खटपट पुलिस से हो जाए उसदिन उसे अपराधी मानकर उसके विरुद्ध कार्यवाही की जाए ये ठीक नहीं है जनता का उत्पीड़न भी तो अपराध है उन पर उसी समय अंकुश क्यों न लगाया जाए !विकास इतने समय तक लोगों का उत्पीड़न करता रहा तब कहाँ था पुलिस प्रशासन और इतने वर्षों विरुद्ध कोई प्रभावी कार्यवाही क्यों नहीं हुई ?चौबेपुर थाने की तरह ही न जाने कितने थानों की पुलिस अभी भी अपराधियों की मदद करने में लगी हो किसी को क्या पता लोग उनके अत्याचार अभी भी सह रहे होंगे जिस दिन उनकी खटपट पुलिस से होगी उस दिन उनके विरुद्ध कार्यवाही होगी !

योगी जी ! विकासदुबे एक व्यक्ति नहीं एक प्रवृत्ति हैं उस प्रवृत्ति को रोकने के लिए भी कुछ कीजिए !

अपराधियों के विरुद्ध कार्यवाही भी उसकी जाति देखकर न की जाए !

विकासदुबे के पिता जी ब्राह्मण हैं इसलिए विकास दुबे भी ब्राह्मण है ब्राह्मण होने के कारण विकास ने अपराध नहीं किया है अपितु अपराधी होने के कारण अपराध किया है !अपराध का उसके ब्राह्मण होने से कोई संबंध नहीं है किंतु अपराधियों के विरुद्ध कार्यवाही करते समय भी यह याद रखा जाना चाहिए कि अपराधी सभी जातियों में हैं कार्यवाही सभी जातियों के अपराधियों पर हो !

Sunday, 12 July 2020

उत्तर प्रदेश पुलिसकर्मियों की नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार की अपेक्षा है !

  उत्तरप्रदेश पुलिस में कर्तव्यनिष्ठा में पर प्रश्न !  
     विकास दुबे को इतना बड़ा खुंखार अपराधी बनने से पहले उस पर अंकुश लगाया जाना चाहिए था उसे इतना बढ़ने का अवसर पुलिस ने दिया ही क्यों कि वो पुलिस पर भारी पड़ गया !
   उत्तरप्रदेशपुलिस की विश्वसनीयता पर प्रश्न !  
     2 और 3 जुलाई की रात  को पुलिस के पहुँचने की सूचना विकास दुबे को  स्वयं पुलिस ने दी !पुलिस के अपने लोगों ने गद्दारी की थी जिसे जनता हमेंशा भोगती है अबकी बार पुलिस को भी अपने महकमें की  गद्दारी की कीमत चुकानी पड़ गई |  

   उत्तरप्रदेश पुलिस की सतर्कता पर प्रश्न !    
     विकास दुबे को अपने प्रदेश में ही घेर कर  पकड़ पाती तब तो उसकी क्षमता का पता लग पाता किंतु वह ऐसा नहीं कर पाई इसीलिए तो वह मध्यप्रदेश पहुँचने में सफल हो  गया !
   
   उत्तरप्रदेश पुलिस के पराक्रम पर प्रश्न !   
  मध्यप्रदेश का एक होमगार्ड जिस खुंखार अपराधी को घेर कर पकड़ने में कामयाब हो जाता है मध्य प्रदेश पुलिस विकास दुबे को सकुशल अपनी सीमा पार करवा देती है ! उसे इतनी भारी भरकम तैयारियों से गई उत्तर प्रदेश पुलिस कानून के कटघरे में खड़ा कर पाने में असफल रही !

    विकास के हथियार छीनते समय पुलिस क्या कर रही थी ?
  विकास दुबे ने पहले इनके हथियार छीन लिए ! फिर एक पैर का लँगड़ा विकास दुबे भागने में सफल हो गया ! विकास दुबे पुलिस पर फायर करने लगा ! जब विकास दुबे को ही सबकुछ करना था पुलिस के बस का कुछ था  ही नहीं तब पुलिस वहाँ करने ही क्या गई थी ! 

     उत्तरप्रदेश पुलिस और मध्यप्रदेश का गार्ड !
     जिस दुर्दांत विकास दुबे को मध्यप्रदेश का एक होमगार्ड काबू कर लेता है वही विकास दुबे उत्तर प्रदेश पुलिस की इतनी तैयारियों पर भारी पड़ जाता है !

     उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती में रखे जाने चाहिए मध्यप्रदेश के कुछ होमगार्ड !
सरकार जनता के खून पसीने की कमाई से प्राप्त टैक्स के पैसों से जिन्हें सैलरी देती है आखिर किसलिए !

 उत्तर प्रदेश पुलिसकर्मियों की नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार की अपेक्षा है !
  पुलिस भर्ती प्रक्रिया  में अभ्यर्थियों को यदि उचित  मानदंडों की कसौटी पर कसा  गया होता तो विकास दुबे से निपटने के लिए परिष्कृत पुलिस पारदर्शिता पूर्वक आदर्श आचरण भी प्रस्तुत कर सकती थी !   
      
इनकाउंटर का विकल्प चिंताजनक !
   कोई आरोपी यदि भागने लगे तो उसका इनकाउंटर ये कैसा कानून !कोई भी आरोपी पुलिस के भय से भागना ही चाहता है तो क्या पुलिस हर किसी अपराधी का काउंटर ही करेगी !जीवन बहुमूल्य होता है अपराधियों जैसा आचरण करने की अपेक्षा पुलिस से नहीं की जा सकती !पुलिस के पास क्या केवल  गोली मारने का ही विकल्प बचता है ?