Monday, 16 March 2015

niraj

भूखपीड़ा में जो स्वत्व तजते नहीं ,
  बासनावेग में भोग भजते नहीं   ।
 कुछ नहीं चाहने की रखें चाह जो ,
  ऐसे बीमार बीमार लगते नहीं॥ 
           -डॉ.एस.एन.वाजपेयी 'शेष' 


दूधिया साइकिल ले के सम्मुख पड़ा कह रहा हो कि बाबू बचा लीजिए !
उत पड़ोसी पड़ा हो रुदन कर रहा कह रहा हो कि मुझको उठा दीजिए !!


Thursday, 26 February 2015

अपने घर के शादी समारोहों में समाज के पैसे से सरकारें करती हैं शक्ति प्रदर्शन !आखिर क्यों ?

 ऐ राजनीति !तुझे धिक्कार !!गरीबों की सेवा के सब्जबाग दिखाकर अपनी और अपनों की ऐश !
   सरकारें जन सेवा के लिए होती हैं न कि सरकारी संसाधनों का उपयोग अपने को राजा महाराजा सिद्ध करने के लिए करें !नेताओं की नियत ही ठीक नहीं है उन्हें इस बात की भी शर्म नहीं होती कि जिन गरीबों के हिस्से का हरण किया हुआ ये धन होता है वो एक एक रोटी के लिए आज भी हैरान परेशान हैं आप उस गरीब समाज के प्रतिनिधि हैं क्यों नहीं झलकती है तुम्हारे चेहरों पर गरीबों की वह पीड़ा कैसे जन प्रतिनिधि हैं आप ! सरकारें जनता की माँ होती हैं धिक्कार है उस माँ को जो खुद तो ऐश करे बच्चों को भूखा  सुला  दे !साकार में बैठे लोगों को पिता का दायित्व निर्वाह करना होता है से कहाँ तक कैसे ,क्यों और कब तक सहे!य्ये भावनात्मक कदाचार !
 "मुलायम के पोते के तिलक में पानी पर खर्च किए 2 करोड़! -news -24"
     किन्तु नेताओं का इस तरह का पैसा है किसका होता है इसे पानी की तरह बहाने में किसी को पीड़ा क्यों नहीं होती !बंधुओ! अक्सर नेता लोग सामान्य या किसान  परिवारों  से आते हैं ये सबको पता है उनके राजनीति में आने से पहले उनके पूर्वजों का कमाया या अपना कमाया हुआ कितना धन था ये आस पास के लोगों से पता लगाया जा सकता है साथ ही किसानों की आमदनी कितनी होती है ये बात पास पड़ोस के किसानों  से पूछी जा सकती है इनके व्यापार क्या हैं उनकी प्रारंभिक पूँजी के स्रोत क्या थे साथ ही उनकी इतनी भारी भरकम आमदनी के प्रमुख साधन क्या हैं और उनके प्रबंधन की  क्या है ?
   सामाजिक आंदोलनों और जन सेवा से जुड़े रहे जन सेवा व्रती लोग यदि अपना संपूर्ण समय सामजिक कार्यों में देते रहे तो ऐसे लोग इतना भारी भरकम धन इकठ्ठा करने में कैसे सफल हो जाते हैं ?वैसे भी अपनी खून पसीने की कमाई के धन को इतने महंगे पानी में पानी की तरह से कैसे बहाया जा सकता है !

Saturday, 14 February 2015

वेलेंटाइन डे या अविवाहितों की अँग्रेजी करवा चौथ ! सेक्सार्थी संस्कृति का महानपर्व !

  मित्रता या मूत्रता  का पर्व है वेलेंटाइन डे ?फोर्थजेंडरी (प्रेमीजोड़े)बड़ी धूम धाम से मनाते हैं इसे !

  फोर्थजेंडरी (प्रेमीजोड़े)   वेलेंटाइन डे को  मित्रतापर्व कहें भले ही किंतु इसकी प्रसिद्ध पहचान मूत्रतापर्व के रूप में ही बनी  हुई  है !इससे आगे इसे बढ़ने ही नहीं दिया गया इसी लिए बहन बेटियों की गौरव रक्षा के लिए लोगों को इसका विरोध भी करना पड़ता है अन्यथा प्रेम पर्व का विरोध कोई क्यों करेगा !

ये कई जगह से प्रमाणित भी हो जाता है आज के दिन शारीरिक संसर्गों की सुविधा प्रोवाइड करने वाले होटल रेस्टोरेंट या और भी छोटे बड़े लोग बड़ा बिजी रहते हैं ऐसी सुविधाओं के लिए इनके रेट काफी बढ़े होते हैं जो ये सब बहन करने की स्थिति में नहीं होते हैं वो झाड़ी जंगलों की ओट में समा जाते हैं कुछ तो पार्कों जैसी सार्वजनिक जगहों पर भी बड़ी बेशर्मी पूर्वक बहुत कुछ निपटा रहे होते हैं। प्रेमी जोड़े नाम के फोर्थजेंडर वाले लड़के लड़कियों में इस दिन अद्भुत उत्साह होता है इन सबों में एक दूसरे से आगे निकलजाने की होड़ होती है ।     इसे देखने वालों का नजरिया भी अलग होता है ऐसे ही कुछ भूतपूर्व फोर्थजेंडरी  लोग  जो विभिन्न क्षेत्रों में जाकर पैसा वैसा कमाकर  बड़े आदमी बन गए हैं वो टी.वी.पर आकर इन फोर्थजेंडरियों  का समर्थन करते देखे जाते हैं कई कई लड़के लड़कियों की होनहार जिंदगियाँ अपनी अपनी बासना की भेंट चढ़ा चुके भूतपूर्व फोर्थजेंडरी लोग  इस नोचा घसोटी को पवित्र प्रेम सिद्ध करने के लिए हमेंशा  आमादा रहते हैं किन्तु इस बात का जवाब इनके पास भी नहीं होता है कि यह   प्रेम यदि वास्तव में पवित्र है तो साल में एक ही दिन क्यों दूसरी बात लड़के और लड़कियों के  ही आपसी संबंधों में क्यों  माता पिता भाई बहनों आदि के साथ क्यों नहीं !और यदि उनके  साथ भी हो तो चौदह फरवरी ही क्यों ये तो प्रतिदिन करना चाहिए !ऐसी शिक्षा अनंतकाल से दी जा रही है फिर आदर्श वेलेंटाइन डे ही क्यों ?

          

        बंधुओ !आप सबको याद होगा कि पहले अपने यहाँ ' वेलेंटाइन डे ' नहीं मनाया जाता था साथ ही यह भी सुना होगा कि तब अपने यहाँ इतने बलात्कार भी नहीं होते थे और जैसे जैसे 'वेलेंटाइन डे 'को मानने वाले लोग बढ़ते जा रहे हैं वैसे वैसे बलात्कार बढ़ते जा रहे हैं । इस अवसर पर एक बात और ध्यान रखनी होगी और कोई वेलेंटाइन डे  को मनाता हो या न मनाता हो किन्तु बलात्कार में संलिप्त लगभग हर सदस्य 'वेलेंटाइन डे'का उपासक जरूर होगा अर्थात वह इस दिन को किसी न किसी रूप में मनाता जरूर होगा ! प्रेमी नाम के जोड़े इस इस तथाकथित पर्व को बड़े धूम धाम से मनाते  हैं आज के दिन पागल हो उठते हैं ये लोग !अपनी अपनी शक्ति सामर्थ्य के अनुशार प्रेमी लोग आपस में कुछ न कुछ लेते देते जरूर हैं खैर लेना देना तो बहाना होता है बाकी शारीरिक अंगों के आनंद का आदान प्रदान अवश्य होता है । मुझे नहीं पता है कि इस धंधे को कितना गन्दा कहूँ किंतु कई प्रेमी प्रेमिकाओं को एक दूसरे के शरीरों की दुर्दशा या हत्या करते देखो उस दिन वेलेंटाइन डे जैसी कुसंस्कृतियों से घृणा जरूर होती है ! समाज के ऐसे ही प्रकटी  करण को वेलेंटाइन डे का विरोधी कहकर उसकी निंदा की जाती है ।

Friday, 13 February 2015

अन्ना हजारे जी के चेले जिन नेताओं के निम्न आचरणों की निंदा किया करते थे वही करते खुद घूम रहे हैं आज ! बारे स्वराज !

  राजनीति के बीहड़ों में सत्ता के दस्यु सरगना लोग स्थापित सरकारों के विरुद्ध दुष्प्रचार कर कर के लूट लेते हैं सरकारें ! और फिर वही काम खुद करने लगते हैं तथा  उन्हीं नेताओं के गले मिलते आज फूले नहीं समाते हैं !हे अन्ना जी !राजनीति में इतना गिर जाते हैं लोग !

     अन्ना हजारे जी के चेले आज उन्हीं नेताओं  के गले मिलते फूले नहीं समा रहे हैं जिनकी  कभी निंदा किया करते थे जिन्हें भ्रष्ट, बेईमान, लुटेरे , घोटालेबाज आदि बताया करते थे आज उन्हीं के गले मिलते हाथ मिलाते पैर छूते घूम रहे हैं उसी तरह के आरोप प्रत्यारोप गाली गलौच कलह कुटिलता पदलोलुपता आदि सब कुछ बिलकुल वैसा ही !कैसी कैसी बातें करके कितना गिर जाते हैं लोग ! 

  यदि आम आदमी पार्टी का सर्वस्व आमआदमी है तो  आदमियों पर ही गर्व क्यों नहीं करना चाहिए  ! वहाँ जाकर गले मिलना हाथ मिलाना निमंत्रण देना क्यों जरूरी है ! क्यों दौड़े घूम रहें हैं उन नेताओं के पास जिन नेताओं को भ्रष्ट,  बेईमान ,लुटेरे आदि क्या कुछ नहीं कहा करते रहे हैं !

   चूँकि ऐसा पहले भी बहुतों ने किया है दूसरों की निंदा केवल चुनाव जीतने के लिए  की जाती रही है और चुनाव जीतते ही आपस में सभी नए और पुराने नेता घुलमिल जाते रहे हैं इन्हें गले लगते या मुस्करा मुस्कराकर बातें करते पहले भी जनता देखती रही है इस प्रकार की कृत्रिम राजनीति !इसीलिए  जनता ने पूर्ण बहुमत देना प्रारम्भ कर दिया है ताकि उसे मजबूत  सरकार मिले मजबूर नहीं !

   जनता आज चाहती है कि जिन नेताओं को बुरा कहा गया है उनसे वास्तव में दूरी बनाकर चला जाए !और या फिर आरोप लगाते समय कुछ संयम बरता जाता !  कुल मिलाकर वास्तव में नेता यदि इतने ही भ्रष्ट हैं तो उनका बहिष्कार क्यों नहीं करते हैं !जनता ने 'आप'के राजनेताओंं को कहे गए इन्हीं अपशब्दों पर प्रभावित होकर बहुमत दिया है क्योंकि वर्तमान राजनीति और राजनेताओं के भ्रष्टाचारी आचरणों से जनता बहुत तंग है ये सच है किन्तु केवल वोट लेने के लिए उन्हें बेईमान,चोर भ्रष्ट आदि कहना और बाद में उन्हीं से गले मिलना हाथ मिलाना शपथ ग्रहण समारोह में आने के लिए आमंत्रित करने उन्हीं के दरवाजों पर भटकना ये जनता को क्यों पसंद आएगा ?माना कि कुछ संवैधानिक मजबूरियाँ हैं तो उतना ही तालमेल रखना ठीक है किन्तु अधिक नहीं !

    जिन नेताओं और पार्टियों को विश्व में चोर,बेईमान और भ्रष्ट आदि कहकर मीडिया के सामने बदनाम किया जाता रहा है !यदि वो नेता इन आपियों का साथ किसी भी स्तर पर देते हैं तो इसका सीधा सा अर्थ है कि उन पर आप नेताओं के द्वारा लगाए जाते रहे  आरोप सच हैं ऐसा उन्होंने स्वीकार कर लिया है !सीधी सी बात है कि -

     'मौनं स्वीकार लक्षणं '

प्रधान मंत्री जी का सम्मान बनाए रखने में ही भलाई है !

              


      प्रधान मंत्री होने के नाते मोदी जी का सम्मान आज देश के सम्मान के साथ जुड़ा हुआ है विगत चुनावों में नेतृत्व से कुछ गलतियाँ हुई सी लगती हैं जिसकी आलोचना मैंने भी की है और आगे भी करता रहूँगा किंतु शालीन शब्दों में और सुधार  की अपेक्षा से ! मोदी जी के लिए अपने कमेंट करने में जो लोग  आज भी  हत्यारा जैसे शब्दों का प्रयोग करते हैं उन्हें इस देश के लोक तंत्र और कानून पर विश्वास नहीं है उन्हें सोचना चाहिए कि देश की जनता ने उन पर भरोसा किया है और कानून ने उन्हें दोषी नहीं ठहराया है तीसरा अपने पास  जबान  गंदी करने के अलावा और  विकल्प क्या है साथ ही मोदी  जी अपने को निर्दोष सिद्ध करना चाहें तो कैसे करें ?

गालियाँ देने के शौकीन लोग अपनी माँ बहनों को गाली दिलाने के लिए ऐसी हरकतें करते हैं !

  गाली देने या लिखने वालों का बहिष्कार करो  !

 जिनके मन में अपनी माँ बहनों के प्रति सम्मान नहीं होता वही देते हैं औरों को गाली !ऐसे पापियों का फेस बुक से बहिष्कार करो ऐसे लोगों का नाम अन्य लोगों को भी प्रेषित करो ताकि वो भी ऐसे पापियों का बहिष्कार करें !कोशिश करो कि ऐसे गंदे लोग अपनी गन्दगी कहीं न फैलाने पाएँ !

     वस्तुतः जिन लोगों के मन में अपनी माँ बहन बेटी का सम्मान नहीं होता है वही किसी दूसरों  को गाली देते हैं  क्योंकि ये उन्हें भी पता होता है कि जो गाली हम सामने वाले को दे  रहे हैं वही वो हमें भी आसानी से दे सकता है इसमें कोई ऐसी कलाकारी नहीं है जो वो नहीं कर पाएगा  यह जानते हुए भी वो गाली  देते हैं इसका सीधा मतलब होता है कि उन पापियों के मन में अपनी माँ बहनों के प्रति कोई सम्मान नहीं है इसीलिए वो इसी बहाने औरों को गाली देने के लिए प्रेरित किया करते हैं गाली देने के लिए उकसाने वाले ऐसे पापियों का बहिष्कार क्यों न किया जाए !

    बंधुओ ! फेसबुक एक स्वतन्त्र विचार मंच है जिसमें हम सभी लोग विभन्न विन्दुओं पर अपना अपना दृष्टिकोण रखते हैं जरूरी नहीं कि हर कोई हर किसी के  दृष्टिकोण से सहमत हो किन्तु इसका ये  मतलब नहीं कि कोई किसी को गाली गलौच करने लगे आज कुछ लोग ऐसे घुस आए हैं उनकी कई जगह अश्लील टिप्पणियाँ देखने को मिली हैं जिन्हें प्रयासपूर्वक एक दूसरे का सहयोग करके हटाई जानी चाहिए एवं ऐसे लोगों का बहिष्कार किया जाना चाहिए !

      


अनशन करते रहे अन्ना जी और मुख्यमंत्री बने केजरीवाल !

    केजरीवाल को मुख्यमंत्री बनाने के लिए चलाया गया था आंदोलन या आंदोलन को सफल बनाने के लिए केजरीवाल को बनाया जा रहा है मुख्यमंत्री !

     अपनी राजनीति चमकाने के लिए अन्ना हजारे के जिन चेलों ने रामलीला मैदान में पवित्र आंदोलन के नाम पर भारी मजमा जुटाया था उनके द्वारा सारे देश वासियों को समझाया गया था कि राजनीति गंदी है  नेता भ्रष्ट हैं बेईमान हैं ,लुटेरे हैं , भ्रष्टाचारी हैं  ,घोटालेबाज हैं आदि आदि  सभी प्रकार से  निंदा कर रहे थे  और भी बहुत कुछ बता रहे थे सारे देश को आंदोलित किया गया था भीड़ जुटाई गई थी।

      'भाजपा ने किरण को बनाया बलि का बकरा': अन्ना हजारे "-अमरउजाला 

    अनशन के नाम पर भूखे रहे अन्ना हजारे अब मुख्यमंत्री बने केजरीवाल ! 'बलि का बकरा' बता रहे हैं किरणवेदी जी को ये सच नहीं है ! जहाँ तक बलि का बकरा  की बात है तो उसके लिए किरन जी का नाम लेना उचित नहीं है दूसरी तरफ अनशन के नाम पर भूखे रहकर जनजागरण करते रहे अन्ना हजारे अब मुख्यमंत्री बने केजरीवाल !यदि ये आपसी सहमति से हुआ तो सच स्वीकार करना चाहिए अन्यथा किसी और पर भी इस प्रकार की टिप्पणी करना ठीक नहीं है ! 

    अन्ना जी !अपनी बात किसी और पर लागू  कैसे कर सकते हैं !किरण जी प्रबुद्ध महिला हैं कर्मठ हैं इतनी  बड़ी अधिकारी रही हैं कई विषयों में उनकी योग्यता प्रमाणित है उन्हें  कोई बलि का बकरा कैसे बना सकता है !दूसरी बात भाजपा की लोकप्रियता इतनी गिरी भी नहीं थी वहाँ तो दूसरी पार्टियों के लोग अंत तक सम्मिलित होते रहे  भाजपा में पूर्व केंद्रीय मंत्री तक सम्मिलित हुई हैं मीडिया तक को ऐसे परिणामों का अनुमान नहीं था और भाजपा ने यदि थोड़ी लापरवाहियां न की होतीं और आम आदमी पार्टी ने सच का साथ लिया होता तो ऐसी स्थिति पैदा ही नहीं होती !खैर ,किरण जी को मुख्य मंत्री पद पर सीधे अपना प्रत्याशी बना लेना ये भाजपा छोटा त्याग नहीं था इसे आप मजबूरी भी कह सकते हैं किंतु कार्यकर्ता को किरण जी से तकलीफ नहीं थी अपितु उनके प्रति दिल्ली भाजपा को समर्पित करते समय उन्हें विश्वास में नहीं लिया गया  जिसका लाभ 'आप' को मिला !इसलिए किरण जी को बलि का बकरा बनाया गया ऐसा  कहना उचित नहीं है ये कोई नेता  तो कह भी सकता है अन्ना  जी को सच बोलना चाहिए !लग रहा है  कि उनकी पार्टी के सत्ता में आ जाने से वो कुछ अधिक ही खुश हैं वैसे भी चुनावों के ऐन समय पर उनके द्वारा केंद्र सरकार के विरुद्ध दिए गए वक्तव्यों अप्रत्यक्ष रूप से लाभ आम आदमी पार्टी को मिला है ।