Wednesday, 13 May 2015

योगदिवस तो ठीक है किन्तु योग कौन ?आजकल तो लोग व्यायाम को भी योग कहने लगे हैं !

 योगी डरपोक नहीं हो सकते ! पहले असली योगी  होते थे जो अपनी तपस्या के प्रभाव से बता दिया करते थे कि कब आएगा भूकम्प !या अन्य प्राकृतिक आपदाएँ !
     अब असली योगी ही नहीं रहे जो होंगे भी वो सामाजिक प्रपंचों से दूर कहीं तपस्या कर रहे होंगे उन  वैराग्य समर्पित दिव्य साधकों की दुनियाँ ही निराली होती है वे व्यापारी नहीं हो सकते !
    असली योगियों को देखकर सिंह जैसे हिंसक जीव स्वयं शिर झुका लिया करते थे सर्प बिच्छू अपना विष वमन करने लगते थे उन योगियों के चरणों में नत मस्तक होकर बड़े बड़े सम्राट अपनी सुरक्षा का आशीर्वाद माँगा करते थे जिनके आशीर्वाद में ब्रह्मांड की शक्तियाँ समाहित थीं
 किंतु कलियुगी योगी दूसरों को क्या सुरक्षित करेंगे खुद इतने डरपोक होते हैं कि अपनी सुरक्षा सरकार से माँगते हैं भूकंप के वो दिव्य दृष्टा लोग होते थे उन्हें भूत भविष्य वर्तमान तीनों काल पता हुआ करते थे !किंतु  भूकंपों का पता कैसे लगे !अब वो असली योगी तो रहे नहीं !
    अब ठहरे कलियुगी योगी जो व्यायाम को ही योग मान बैठे हैं ऐसे कलियुगी योगियों को तो भूकंप का पता भी तब लगता है जब दीवारें हिलने लगती हैं !सिद्ध योगी आशीर्वाद से समाज की रक्षा कर लेते थे कलियुगी योगी खाने पीने वाली चीजें बाँटने लगते हैं !
      आज व्यायाम करने वाले लोग अपने को योगी या योग गुरु कहने लगे, तो असली योगी लोग  मौन हो गए उन्हें प्रचार की क्या जरूरत !उन्हें टीवी पर बोलने की चाहत तो होती भी नहीं है ! अब कहाँ दिखाई पड़ते हैं असली योगी अर्थात योगसिद्ध लोग ? आज असली योगियों के तो दर्शन ही  दुर्लभ हैं !
       पहले  जो भी असली योगी होते रहे हैं उन्होंने समय समय पर समाज की बहुत मदद की है हमारी संस्कृति में ऐसे प्रमाण मिलते हैं कि योगी लोग अपने योग बल से त्रिकाल में घटित होने वाली घटनाओं को न केवल जान लिया करते थे अपितु उन्हें एक सीमा तक टाल सकने की क्षमा भी रखते थे !किंतु आज असली योगी तो दिखाई नहीं पड़ते इसीलिए तपस्या और योग तो ढकोसला होता जा रहा है !
    हर बाबा के चेले उसे भगवान बताने पर तुले हैं साईं बुड्ढे के चेले तो मूर्तियाँ भी लगवा रहे हैं अपने को सिद्ध आत्मज्ञानी कहने वाले कुछ लोग तो जेलों को पवित्र करते घूम रहे हैं कुछ दवा दारु के व्यापार में लगे हुए हैं किंतु ये सिद्ध प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा तो कर नहीं सकते उसके विषय की जानकारी भी नहीं दे सकते हैं तो काहे के योगी किस बात के सिद्ध !
    आपने कई बाबाओं के सामने उनके चेला चेलियों को गिड़गिड़ाते देखा होगा पता नहीं किस बात से उन्हें विश्वास होता है कि हमारे गुरु जी या भगवान जी या आत्मज्ञानी जी दुनियाँ बदल सकते हैं आप स्वयं देखिए -

   "नेपाल में भूकंप, गुरमीत राम रहीम से रहम की पुकार"

   भारत में चर्चित डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह राम रहीम के भक्‍तों ने अपने बाबा से रहम की गुहार लगाई है। डेरा सच्‍चा सौदा के अनुयायियों का मानना है कि यदि उनके बाबा चाहें तो इस कुदरती आपदा से दुनिया और लोगों को बचा  सकते हैंsee more... http://naidunia.jagran.com/national-nepar-earthquake-followers-pray-to-gurmeet-singh-ram-rahim-366776?src=jfb 


Tuesday, 12 May 2015

राहुल जी ! ऐसा तो नहीं चलेगा कि हम सूट पहनें तुम न पहनो ! आखिर इसका क्या मतलब है ?

 जिस देश का  प्रधान मंत्री अपने मन का सूट पहनने के लिए भी स्वतंत्र न हो  उनकी अन्य क्षमताओं पर क्या कहा जाए !
   वैसे भी अब केंद्र में सरकार बदल चुकी है इसलिए "आज किस कलर की पगड़ी पहननी है"यह पूछने उनके पास अब कोई नहीं जाएगा !
    पहनावा का सरकार चलाने से क्या लेना देना !इसका ये मतलब तो नहीं कि यदि हम धोती कुर्ता पहनते हैं तो कुछ और पहनने वालों को चोर कहने लगें !भाषाई संयम रखा जाना चाहिए था और बात मुद्दे पर होनी चाहिए !वैसे भी ऐसा तो नहीं चलेगा कि हम सूट  पहनें तुम न पहनो !इसका क्या मतलब है ?

जहाँ तक बात वर्तमान प्रधानमंत्री जी की है उनके या उनकी सरकार के अभी तक के आचरणों को सामने रखकर उन्हें चोर नहीं कहा जा सकता इतना अवश्य हो सकता है उन्होंने जितने समय में जो काम करने के लिए कहे हों वो न कर पाए हों किंतु यदि सूट बूट की सरकार कहकर इशारा देश के प्रधानमंत्री की ओर किया जा रहा हो तो ये बिलकुल ठीक नहीं है । प्रधान मंत्री किसी भी पार्टी के क्यों न हों उनका सम्मान बनाए रहने में ही भलाई है !
       जहाँ तक बात सूटबूट पहनने की है तो कई लोग कई प्रकार के पहनावे पहनते हैं इसका मतलब क्या हुआ कि वो ठीक नहीं हैं !और बात यदि मोदी जी के उस सूट को लेकर की जा रही हो जिसकी नीलामी हो गई तो ये  अत्यंत निचले स्तर की टिप्पणी है ये अस्वीकार्य है !
     जहाँ तक बात ओबामा के सामने सूट पहनकर  बैठने की है उस पर किसी भी प्रकार से अँगुली नहीं उठाई जा सकतीं क्योंकि ऐसी पोशाक मोदी जी प्रतिदिन नहीं पहनते हैं और किसी विशेष दिन विशेष परिस्थिति में विशिष्ट अतिथि के साथ वार्ता में पहनी गई पोशाक को विशेष परिप्रेक्ष्य में ही देखा जाना चाहिए उस दृष्टि से हमें इस बात का भी विचार करना होगा कि क्या भारत का प्रधान मंत्री इतना लाचार है कि एक सूट पहनकर बैठ क्या गया अभी भी सूट  की चर्चाएँ नहीं समाप्त हो रही हैं जबकि सूट  नीलाम किया गया या करना पड़ा मुझे नहीं पता किंतु इसी बहाने जन भावनाओं का सम्मान करते हुए सूट  का मोह  छोड़ने में उन्होंने देर नहीं लगाई इस व्यवहार का भी सम्मान होना चाहिए । विपक्ष का मतलब विरोधी पक्ष न होकर अपितु प्रतिपक्ष होता है इसलिए हर बात का विरोध करने से तो सत्ता का भुक्खड़पन झलकता है जो ठीक नहीं है । 
        मोदी साकार को अभी समय दिया जाएगा जब कमियाँ  होंगी तो आलोचना उनकी भी होगी किंतु अकारण  उनकी सरकार के प्रति अरुचि फैलाना ठीक नहीं है ।

इसी विषय में देखें हमारे ये लेख -
  • मोदी जी कोट नहीं तो क्या लँगोट पहनकर बैठ जाते ओबामा के सामने !आखिर क्यों उठाए जा रहे हैं कोट पर प्रश्न ?see more .... http://samayvigyan.blogspot.in/2015/02/blog-post_5.html
  • मोदी जी के सूट की नीलामी !जन भावना को नमन ! बारे लोकतंत्र ! ऐसा करने के लिए प्रधानमंत्री जी को बधाई !seemore... http://samayvigyan.blogspot.in/2015/02/blog-post_21.html

 



Wednesday, 6 May 2015

pata

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के घर ऑफिस के पते एवं फोन नंबर एक आम भारतीय नागरिक कभी भी अपनी बात , पत्राचार या फेक्स द्वारा कह सकते है

प्रधानमंत्री कार्यालय
152 , साउथ ब्लॉक ,
रायसीना हिल , नई दिल्ली , पिन कोड 110011

फोन 011-23012312, 011-23018939

फेक्स - 011-23016857
---------------------------------
घर का पता - 7 रेस कोर्स रोड ,नई दिल्ली 110001

फोन 011-23011156 , 011-23016060
फेक्स - 011- 23018939
-------------------------------
लोकसभा का पता

कक्ष नंबर 10
फोन 011 23017660
फेक्स -011 -23017449

Tuesday, 5 May 2015

अधिकारियों की ईमानदारी कर्मठता एवं प्रजाप्रेम पर कर्मचारियों को भरोसा होता तो क्यों होता भ्रष्टाचार !

       घूँस लेने के लिए कर्मचारियों का सहारा लेने वाले अधिकारी उन्हें उनके कर्तव्य पालन के लिए प्रेरित कैसे कर सकते हैं इसी प्रकार से घूसखोर मंत्री सांसद विधायक आदि सरकारी काम काज देखने के लिए क्यों घुसेंगे सरकारी आफिसों में ! किसी के महीने बँधे हैं किसी के हफ्ते किसी के साल बँधे हैं कर्मचारियों का काम जनता से पैसे लेना और सबका पैसा सब तक पहुँचाना है आखिर काम कौन करे ! 
ड्यूटी जनता के काम शक्ति के माध्यम घूँस      
अधिकारियों के अतीत के आधार पर ईमानदार कर्मठ एवं प्रजावत्सल अधिकारियों की खोज हो और उन्हें सौंपी जाए भ्रष्टाचार भगाने की जिम्मेदारी बाकी को बिना कोई सुविधा दिए ही चलता किया जाए
       
पुलिस महानिदेशक का यह आचरण भी खोल गया कानून की पोल !"वकालत के एग्जाम में नकल करते धरे गए पुलिस महानिदेशक-Aajtak"
       किंतु अनुमान है कि ऐसे अधिकारी के विषय में परीक्षा निरीक्षक को पता ही नहीं था कि जिन्हें वह परीक्षा केंद्र से निकाल रहे हैं वह आईपीएस अधिकारी हैं अन्यथा हो सकता है कि यह स्थिति ही न पैदा होती । यदि पुलिस अधिकारी को स्कूल में पकड़े जाने का थोड़ा भी शक होता तो शायद वो ऐसा करते ही नहीं इसका सीधा सा मतलब है हमारा कठोर कानून आजादी के इतने वर्षों बाद भी अपने अधिकारियों को ही जब अपनी कठोरता से परिचित नहीं करा सका है तो आम जनता ऐसे कानूनों की कठोरता पर भरोसा कैसे करे !ऐसी परिस्थिति में भ्रष्टाचार रोकने की उम्मीद कैसे की जा सकती है !

Monday, 4 May 2015

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डॉ.शेष नारायण वाजपेयी
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व्याकरणाचार्य (एम.ए.)संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी
ज्योतिषाचार्य (एम.ए.ज्योतिष)संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी
एम.ए. हिन्दी कानपुर विश्व विद्यालय
पी.जी.डिप्लोमा पत्रकारिता ,उदय प्रताप कॉलेज वाराणसी
पी.एच.डी. हिन्दी (ज्योतिष)बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी बी. एच. यू. वाराणसी
विशेष योग्यताः- वेद, पुराण, ज्योतिष, रामायणों तथा समस्त प्राचीन वाङ्मय एवं राष्ट्र भावना से जुड़े साहित्य का लेखन और स्वाध्याय

हमारेलिखी हुई पुस्तकें-

प्रकाशितः- पाठ्यक्रम की अत्यंत प्रचारित प्रारंभिक कक्षाओं की हिन्दी की किताबें
   कारगिल विजय (काव्य )
श्री राम रावण संवाद (काव्य )
श्री दुर्गा सप्तशती (काव्य अनुवाद )
श्री नवदुर्गा पाठ (काव्य)
श्री नव दुर्गा स्तुति (काव्य )
श्री परशुराम (एक झलक)
श्री राम एवं रामसेतु
(21 लाख 15 हजार 108 वर्षप्राचीन)
कुछ मैग्जीनों में संपादन, सह-संपादन, स्तंभ लेखन आदि।
अप्रकाशित साहित्यः- श्री शिव सुंदरकांड, श्री हनुमत सुंदरकांड,
संक्षिप्त निर्णय सिंधु, ज्योतिषायुर्वेद, श्री रुद्राष्टाध्यायी, वीरांगना द्रोपदी, दुलारी राधिका, ऊधौ-गोपी संवाद, श्रीमद्भगवद् गीताकाव्यानुवाद
रुचिकर विषयः- प्रवचन, भाषण, मंचसंचालन, काव्य लेखन, काव्य पाठ एवं शास्त्रीय विषयों पर नित्य नवीन खोजपूर्ण लेखन तथा राष्ट्रीय भावना के विभिन्न संगठनों से जुड़कर कार्य करना।
जन्मतिथिः 9.10.1965
जन्म स्थानः- पैतृक गाँव - इंदलपुर, पो.- संभलपुर, जि.- कानपुर,उत्तर प्रदेश
तत्कालीन पता :
के -71, छाछी बिल्डिंग चौक,
कृष्णा नगर, दिल्ली-110051
दूरभाष : 01122002689, 01122096548,
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ई - मेल : vajpayeesn @gmail.com 

आदरणीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी एवं श्री श्याम बिहारी मिश्र जी के साथ 

आचार्य डॉ.शेष नारायण  वाजपेयी

श्रद्धेय श्री रज्जू भइया जी के साथ आचार्य डॉ.शेष नारायण वाजपेयी 

आदरणीय  डॉ. मुरली मनोहर जोशी जी के साथ 

आचार्य डॉ. शेष नारायण वाजपेयी                श्रीमान कुशाभाऊ ठाकरे जी के साथ आचार्य डॉ. शेष नारायण वाजपेयी


श्रीमती सुषमा स्वराज जी के साथ आचार्य डॉ. शेष नारायण वाजपेयी

        श्री मदनलाल खुराना जी के साथ आचार्य डॉ.शेष नारायण वाजपेयी







 
                                            



                पांचजन्य में प्रकाशित अंश 



                            

आदरणीया श्रीमती रीता वर्मा जी के साथ आचार्य  डॉ. शेष नारायण वाजपेयी

                                                                                                                                                                                                                                                        



Teliphone

माननीय मंत्री जी !
श्रीमान जी ! पूर्वी दिल्ली !कृष्णा नगर में के-71,छाछी बिल्डिंग में मेरा निवास है,सोसल साइट पर अधिक से अधिक समय देता हूँ 011,22002689 मेरा फ़ोन नम्बर है !
     महोदय !पिछले लगभग 6 महीने से छुट्टी   के एक दिन पहले शाम को लगभग 5 बजे हमारा फोन या इंटरनेट या दोनों ख़राब हो जाते हैं या कर दिए जाते हैं ,मेरा काम बंद हो जाता है ये सच है फिर जिस दिन आफिस खुलते हैं तब कम्प्लेन करता हूँ एक दो दिन में ठीक होता है फिर तब तक शुक्रवार के शाम पाँच बजते ही फिर …!
    इसके लिए जहाँ तक मेरे द्वारा पहुँचा जा सकता है वहाँ तक जाकर कम्प्लेन किया है उसका इतना असर होता है कि ठीक कर दिया जाता है फिर कभी भी बिगड़ जाए उसकी कोई सुनवाई नहीं है । 
     लगभग आठ दिन हुए  हमारे यहाँ के DG मिस्टर गहलौत साहब ने तो यहाँ तक बोल दिया कि "मैं किसी के बाप का नौकर नहीं हूँ "और भी बहुत कुछ वो बोला जो उन्हें नहीं बोलना चाहिए था ये बातें मैंने जी.एम. साहब को भी बताई थीं किंतु मेरी सुने कोई क्यों ?
   महोदय !  मैं स्वतन्त्र भारत का बेचारा वो उपभोक्ता हूँ जिसे सरकार ने केवल इतने अधिकार दे रखे हैं कि यदि हमें अपने काम कराने हैं तो हाथ पैर जोड़कर ,गिड़गिड़ाकर , सुविधा शुल्क से खुश करके करा सकते हैं अन्यथा एक उपभोक्ता के पास कोई दूसरा ऐसा विकल्प नहीं है जिससे वो कर्मचारियों अधिकारियों से अपना जरूरी काम करवा सके !क्योंकि उपभोक्ता उनका कुछ बिगाड़ नहीं सकता है अतएव उपभोक्ता का काम वे क्यों करें ?
      महोदय !अभी भी छुट्टियाँ शुरू होने की पूर्व संध्या पर शुक्रवार सायं पाँच बजे मेरा फोन 011,22002689 बंद हो गया था मंगल को आफिस खुलेंगे तब कम्प्लेन करेंगे तब एक दो दिन में ठीक हो जाएगा ऐसी आशा है अबकी संयोग से उन लोगों ने हमारा नेट नहीं ख़राब किया था जिससे हमारा लिखना पढ़ना बंद नहीं हुआ है ! 
       अस्तु !मंत्री जी !यदि हमारी समस्या का भी कोई समाधान हो तो करवाकर अनुग्रह कीजिए !
                                                                                                    भवदीय -डॉ.शेष नारायण वाजपेयी

चुनाव जीतने या हारने के बाद मीडिया से चिढ़ने क्यों लगते हैं नेता !

     नेताओं को दुश्मन क्यों लगने लगता है मीडिया ?
    जनता को दिए गए बचनों और दिखाए गए सपनों के विरुद्ध आचरण करने वालों को दुश्मन लगने लगता है मीडिया और स्पष्ट वादी लोग !
"अरविंद केजरीवाल ने फिर बोला मीडिया पर हमला -एक खबर"
    किंतु अरविन्द जी ! मीडिया तो पैसे लेकर गधों को घोड़े बनाने का काम हर क्षेत्र में कर ही रहा है वैसे भी किया ही करता है अन्यथा झूठे वरदान देने वाले राजनैतिक निर्मल बाबाओं को कौन जनता ! सुवुधाएँ देने का झूठा लालच देकर मतदाताओं को अपने जाल में फँसा कर सत्ता शिखरों पर बैठाता भी तो मीडिया ही है !
    ये तो सृष्टि का सिद्धांत है इसमें आपका दोष ही कहाँ है ! संसार में जिनका चरित्र नष्ट होने लगता है वे ज्योतिषियों की बुराई करने लगते हैं क्योंकि उन्हें पता होता है कि अब ये हमारी भी पोल खोलेंगे ! इसी प्रकार जिनकी आयु समाप्त हो जाती है वे चिकित्सा विज्ञान को झूठा बताने लगते हैं उन्हें पता होता है कि अब ये हमें बचा नहीं पाएँगे । बंधुओ ! जिसका चरित्र और आयु दोनों नष्ट हो जाएँ वे  चरित्रवान साधू संतों एवं सज्जनों की बुराई करने लगते हैं !क्योंकि आयु समाप्त होने या भाग्य के साथ न देने पर साधू संतों बड़े बूढ़ों का आशीर्वाद भी लगने नहीं लगता है। इसी प्रकार से राजनीति में जो नेता दल दिल और बचन बदलने और बनावटी जीवन जीने लगे तो उसे मीडिया और वो लोग दुश्मन दिखाई पड़ने लगते हैं जो उनकी कही हुई पुरानी बातें उन्हें याद दिलाते हैं आखिर मीडिया भी तो दर्पण दिखाने का ही काम करता है न !see more... http://jyotishvigyananusandhan.blogspot.in/2015/03/blog-post_11.html